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Bareilly: गाजियाबाद धर्मांतरण मामले पर खुलकर बोले मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, सरकार से मांग; नौजवानों से अपील

Wed, 07 Jun 2023 01:02 PM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली

सार

मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम मजहब में स्पष्ट है कि लालच और डराकर ये दबाव डालकर किसी भी व्यक्ति का धर्मांतरण करना जायज नहीं है। 
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मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक बयान में कहा कि गाजियाबाद की घटना ने सबको चिंतित कर दिया है कि गेम के जरिए एक पाकिस्तानी एप यूथ क्लब से कुछ नौजवान जुड़े और उनको धर्मांतरण करने के लिए लालच का सहारा लिया गया। इस्लाम मजहब में स्पष्ट है कि लालच और डराकर ये दबाव डालकर किसी भी व्यक्ति का धर्मांतरण करना जायज नहीं है। 

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ये पाकिस्तानी एप्स से बचें नौजवान
अगर पैगम्बरे इस्लाम की पूरी जिंदगी देखें तो उनकी जिंदगी में कोई भी इस तरह की एक घटना नहीं हुई, उनके अख्लाक मोहब्बत और प्यार से ही लोगों ने धर्म तब्दील किया। बिल्कुल इसी तरह भारत में सूफियों का भी तरीका रहा है। सूफियों ने भी भारत में प्यार मोहब्बत और दिलों को जोड़ने का काम किया। गाजियाबाद में नौजवान गेम के जरिए धर्मांतरण कराए गए। ये पाकिस्तानी एप है और बहुत सारे पाकिस्तानी एप्स के जरिए आतंकवादी गतिविधियां भी की जाती रही हैं, ये देशवासियों के लिए चिंता का विषय है।

ऐसी साइट और एप्स को सरकार करे बैन
मौलाना ने कहा कि नेट और सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है। जिस पर हुकूमत के अलावा कोई पाबंदी नहीं लगा सकता है। अगर हुकूमत चाहे तो समाज को तोड़ने वाली, देश विरोधी और नफरत फैलाने वाली साइड पर पाबंदी लगा सकती है। पाकिस्तान के बहुत सारे विद्वान दुनिया के मुख्तलिफ हिस्सों में रह कर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं, जिनमें खास तौर पर लाहौर निवासी मौलाना तारीक जमील, हैदराबाद निवासी डॉं असरार अहमद, कराची निवासी डॉं ताहिरूल कादरी जैसे लोगों का नाम लिया जा सकता है। इन लोगों के अलग-अलग नामों से संगठन बने हुए हैं और उनके संगठनों की शाखाएं दुनिया के विभिन्न देशों में स्थापित है और उसकी शाखाएं खुद भारत के विभिन्न राज्यों में सालों से स्थापित है। देखने और जांच पड़ताल का काम हुकूमत का है।
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मौलाना ने आगे कहा कि मैं भारत के तमाम मुस्लिम नौजवानों से अपील करता हूं कि पाकिस्तान द्वारा संचालित सोशल मीडिया को न देखें और उनके एप्स से न जुड़ें। पाकिस्तानी विद्वानों की तकरीरें न सुनें, भारतीय विद्वानों की ही तकरीरें सुनें। इसलिए की पाकिस्तानी विद्वान कश्मीर के मुद्दे को लेकर भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब करने की कोशिश करते हैं और कश्मीरी मुसलमानों को भारत के खिलाफ भड़काने और उकसाने का भी काम करते हैं। उक्त लोगों ने अपने लिट्रेचर में कश्मीर के मुसलमानों को मुद्दा बनाया है और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया है। इस तरह के लिट्रेचर भारत में भी प्रकाशित हो रहे हैं। इस पर ध्यान न दिया गया तो कुछ सालों के बाद बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। और ये काम अभी से नहीं है बल्कि कई सालों से चला आ रहा है, दिल्ली में लगने वाले पुस्तक मेलों में प्रतिबंधित संगठनों के भी लिट्रेचर पाये गये थे।
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