एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि कॉल रिकार्डिंग, लोकेशन व बैंक खातों की जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य आरोपी ओमवीर बेहद तंगी से जूझ रहा था। सितंबर में उसके खाते में केवल चालीस रुपये बचे थे। ये भी उसने ऑनलाइन एप से खर्च कर लिए। पांच रुपये का ब्याज बैंक ने उसे दिया तो किसी लोन में कट गया। ऐसे में उसे दुबला पतला मनीष आसान लक्ष्य नजर आया। उम्मीद थी कि मामला ठंडा पड़ते ही चार से पांच लाख रुपये घरवालों से मांगेंगे, दो से तीन लाख आसानी से मिल जाएगा। उम्मीद न थी जो पकड़ जाएंगे।
जिन्न ने दिया था इशारा- अभी हरकत की तो फंस जाओगे
एसएसपी ने लाउडस्पीकर पर दो कॉल रिकार्डिंग सुनवाईं जिसमें ओमवीर की बात रिश्ते के मामा नन्हे कश्यप से हो रही है। दरअसल हत्या के कुछ दिन बाद हुई ये बातचीत पुलिस ने टेप कर ली थी। इसमें ओमवीर लेखपाल के परिवार को लेखपाल के ही उस नबर से कॉल कर रुपये मंगाने को उतावला दिख रहा है जो सिम मोबाइल फेंकने के बाद उसने सावधानी से रख लिया था। प्लान था कि इसी नंबर से कॉल कर फिरौती चलती हुई ट्रेन में ली जाएगी। पांच दिसंबर को यह सिम एक मोबाइल में डालकर भी देखा गया लेकिन इनकमिंग व आउटगोइंग सब बंद थी तो ओमवीर इसे रिचार्ज कराने को उतावला था। मामा नन्हे झाड़फूंक करता था और खुद पर किसी जिन्न का साया बताता था। उसने अपने जिन्न से बात होने का जिक्र कर अभी खतरा बताया।
अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
लेखपाल के अपहरण और हत्या के मामले में जहां परिवार ने फरीदपुर तहसील प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, वहीं विपक्ष भी सरकार को घेरने के मूड में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले में प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने फेसबुक पर लिखा है कि बरेली में कई दिनों से लापता लेखपाल का सिर नाले में मिलने के बाद परिजनों ने उप्र के अंदर चल रही उस सांठगांठ पर अंदेशा जताया है, जिसके एक छोर पर सरकारी भ्रष्टाचार है और दूसरे छोर पर भूमाफ़िया। भूमाफिया ही उत्तर प्रदेश की सरकार चला रहे हैं, बाकी सब तो चेहरे हैं।