फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलविदा 2024: कागजों पर स्मार्ट बन रहा बरेली, शहर बढ़ा... पर सुविधाएं नहीं; जानें एक साल का लेखा-जोखा

Fri, 27 Dec 2024 11:48 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

स्मार्ट बन रहे बरेली शहर का विस्तार तो हुआ, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं। साल 2024 में कई योजनाएं अधूरी रह गईं।  रामगंगानगर आवासीय परियोजना में सड़क-पानी, बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाओं का अकाल रहा। 
विज्ञापन
सेटेलाइट बस अड्डा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली में नई आवासीय योजनाएं शुरू हुईं। यातायात सुविधाओं को भी बेहतर करने की दिशा में काम हुआ। लेकिन, तमाम दावों-वादों के बाद भी नागरिक सुविधाएं बेहतर नहीं हो सकीं। बीडीए की रामगंगानगर जैसी आवासीय कॉलोनियों में भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई घरों में बिजली-पानी के कनेक्शन तक नहीं हैं। स्ट्रीट लाइटें नहीं जलतीं। सड़कों की हालत भी ठीक नहीं। ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण शहर के लिए नासूर बन चुके हैं। सीवर, पानी, बिजली की लाइनें बिछाने के लिए सड़कें खोदीं गईं, पर समय रहते उनको ठीक नहीं कराया गया। 

विज्ञापन


प्रस्ताव से आगे न बढ़ सकी बीडीए की टाउनशिप
आवास विकास परिषद, परसाखेड़ा में आवासीय योजना विकसित कर रहा है। यहीं बगल में रहपुरा जागीर में 113 हेक्टेयर भूमि पर बरेली विकास प्राधिकरण की इंडस्ट्रियल टाउनशिप प्रस्तावित है। रामगंगानगर के निकट 239 हेक्टेयर भूमि पर ग्रेटर बरेली परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। रामगंगा नदी के पार 264 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नाथधाम टाउनशिप विकसित करने की कवायद जारी है। 

स्मार्ट सिटी: खर्च में आगे, सुविधाएं देने में फिसड्डी
900 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं से विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सड़कों पर गड्ढे बरकरार हैं। लाइटें लगने के बावजूद कई स्थानों पर अंधेरा रहता है। सात परियोजनाएं पूरी होकर भी अधूरी हैं। स्काई वाॅक, लाइट एंड साउंड सिस्टम, म्यूजिकल फाउंटेन, संजय कम्युनिटी सरोवर, काॅमर्शियल कॉम्प्लेक्स सिर्फ नाम के हैं, काम के नहीं। सुभाषनगर का अंडरपास बन नहीं सका। छुट्टा पशुओं से सड़कों को खाली कराने के दावे सच नहीं हुए। लोक निर्माण विभाग की नाथ कॉरिडोर और सेतु निगम की परियोजनाओं के पूरे होने का इंतजार है। 170 करोड़ की लागत से एक साल पहले बनकर तैयार हुआ अर्बन हाट भी संचालन की राह देख रहा है।

विज्ञापन

इंतजार: रिंग रोड का सपना 34 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ
रिंग रोड का सपना 34 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ। वर्ष 1993 में रिंग रोड की परिकल्पना हुई। टेंडर प्रक्रिया और बजट आवंटन के बाद काम आगे बढ़ा, लेकिन आधा ही हुआ। अब आधे काम को पूरा कराने के लिए एनएचएआई ने 1,700 करोड़ रुपये की परियोजना बनाई है। निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है, पर सिर्फ भूमि का मुआवजा देने के लिए 800 करोड़ की मंजूरी मिल सकी है।
1700 करोड़ रुपये की परियोजना बनाई
800 करोड़ की मंजूरी मिल सकी

कसक : बजट नहीं मिलने से भवन अधूरा
शैक्षिक विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना अधूरी रही। राजकीय पॉलिटेक्निक के अधूरे भवन को पूरा करने के लिए शासन स्तर से बजट आवंटित नहीं हुआ। पूरे साल पत्राचार होता रहा। इसे पूरा करने के लिए करीब 6.78 करोड रुपये की जरूरत है। राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार का कहना है कि किसी भी समय पर बजट जारी हो सकता है।

देरी से ही सही शुरू हुआ विकास
बहुप्रतीक्षित ग्रेटर बरेली आवासीय परियोजना भी आकार ले रही है। इसके सेक्टर-एक से चार तक बीडीए ने सड़क, पानी की लाइन, सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू करा दिया है। वर्ष 2025 में यहां आवंटियों को भूखंडों पर कब्जा दिए जाने की योजना है।

बरेली-सितारगंज हाईवे - फोटो : अमर उजाला
सितारगंज हाईवे : घोटाले से सुस्त हुई रफ्तार 
बरेली-सितारगंज हाईवे पर भू अधिग्रहण घोटाले की आंच आई। तीन माह तक परियोजना जांच में फंसी रही। इस दौरान काम ठप रहा। जांच पूरी होने के बाद काम को रफ्तार दी गई। इसका निर्माण 2026 तक पूरा होगा। बरेली-बदायूं हाईवे के चाैड़ीकरण की वित्तीय बिड भी खुल चुकी है।

एक ट्रांसमिशन और तीन बिजली उपकेंद्र मिले, पर व्यवस्था में नहीं आया सुधार 
शहर की बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए भी कई काम हुए, अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। साउथ सिटी में 220 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र का काम पूरा होने के बाद भी सुभाषनगर, मढ़ीनाथ और किला उपकेंद्रों की वहां से आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। सुभाषनगर में बिजली उपकेंद्र की स्थापना के लिए पूरे साल जमीन ही नहीं मिल सकी। हालांकि, पवन विहार में उपकेंद्र का निर्माण शुरू हो गया है। शहर के ज्यादातर इलाकों में लाइनें बदलने का काम भी इस साल पूरा हो गया। अगले साल गर्मियों में सुधार की उम्मीद है।

न अतिक्रमण से मुक्ति और न मिल सका जाम से छुटकारा
जाम से निपटने और शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए ई-रिक्शा, ऑटो के निर्धारित रूटों पर कलर कोडिंग से संचालन की कवायद आगे ही नहीं बढ़ सकी। इस दौरान शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता रहा। ट्रैफिक पुलिस जाम से निजात के लिए तरह-तरह के प्रयोग करती रही, पर कामयाबी नहीं मिली।

सड़कों का चौड़ीकरण नहीं करा पाए अधिकारी
एक साल से बजट होने के बावजूद तपेश्वरनाथ मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण नहीं हो सका। पीडब्ल्यूडी ने रेलवे से अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा था, लेकिन मामला अटक गया। सेटेलाइट से बड़ा बाइपास तक का मार्ग सिक्स लेन नहीं हो सका। कभी मंडलायुक्त ने पहल की तो कभी विधायक ने पैरवी की, प्रस्ताव बनते रहे, लेकिन निर्माण के लिए 301 करोड़ रुपये नहीं मिले।

पुलों से मिली शहर को रफ्तार - फोटो : अमर उजाला
पुलों से मिली रफ्तार
महादेव सेतु बना, अटल और चौपुला पुल आपस में जुड़े अटल और चौपुला सेतु के आपस में जुड़ने से तीन साल का इंतजार खत्म हुआ। तमाम अड़चनों को दूर कर 105 करोड़ की लागत से कुतुबखाना पर बना 1306 मीटर लंबा महादेव सेतु यातायात को रफ्तार दे रहा है।

नाथ कॉरिडोर की मिली सौगात
शहर के शिव मंदिरों को आपस में जोड़ने के लिए 75 करोड़ रुपये लागत के नाथ कॉरिडोर की सौगात मिली। दस मार्गों का चौड़ीकरण हो गया। कॉरिडोर बनने से आवागमन आसान हो गया है। डेलापीर में डमरू चौक बना।
विज्ञापन

आकार ले रही रामायण वाटिका
रामगंगानगर में 32.5 करोड़ रुपये की लागत से रामायण वाटिका आकार लेने लगी है। इसके निर्माण में तेजी आई है। गांधी उद्यान के बाद यह शहर के लिए दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक पार्क होगा। यहां 9.30 करोड़ रुपये की लागत से वनवासी राम की 51 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा मूर्तिकार राम सुतार तैयार कर रहे हैं। हनुमानजी की मूर्ति लग चुकी है। साल के अंत में प्राधिकरण ने यहां पुष्प प्रदर्शनी भी आयोजित करने की तैयारी की है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें