बरेली। रुहेलखंड विवि में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र के व्हाट्सएप स्टेट्स पर सेना संबंधी कमेंट के बाद खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। पुलिस और खुफिया अमले के लोगों ने शुक्रवार को विवि जाकर मामले की जांच की। पता लगा कि छात्र कश्मीर गया हुआ है। अब शिकायतकर्ता छात्र भी नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।
रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के छात्र शकील अहमद मलिक ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के सोपोर में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग टीम पर हुए हमले को लेकर सेना पर टिप्पणी करते हुए स्टेटस लगाया था। उसने आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति दिखाई थी, जिसका स्क्रीनशॉट लेकर अंकित पाल नाम के दूसरे छात्र ने एडीजी को ट्वीट कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शकील की चैट भी वायरल हुई, जिसमें छात्र ने खुद को भारत का नागरिक होने से इंकार करते हुए धारा 370 हटाने को लेकर टिप्पणी की थी।
इसका स्क्रीन शॉट लेकर निहार त्यागी नाम के एक शख्स ने शकील पर कार्रवाई की मांग की है। छात्र की देश विरोधी गतिविधियों और सेना के खिलाफ मानसिकता को देखते हुए पुलिस ने कश्मीरी छात्रों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले अन्य कश्मीरी छात्रों की गतिविधियां देखने पुलिस और खुफिया अमले की टीम विवि पहुंची तो वहां लॉकडाउन के चलते अवकाश की वजह से कोई नहीं मिला। पता लगा कि कश्मीरी छात्र काफी दिन पहले से ही अपने घर गया हुआ है। उसके साथी भी नहीं मिले।
जिला कुलगांव के शकील के साथ ही विवि में पढ़ने वाले उसके साथी जम्मू कश्मीर के जिला सांबा निवासी सोहिल, जिला अनंतनाग के शाहबाज अहमद वानी के बारे में भी पुलिस विवि प्रशासन से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। वहीं शिकायत करने वाला छात्र भी अब तक सामने नहीं आया है, जिसके बारे में जानकारी की जा रही है। लॉकडाउन के कारण यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले अन्य छात्रों के साथ ही कश्मीरी छात्र अपने घरों को लौट गए हैं।
कश्मीरी छात्रों का आतंकी कनेक्शन
लखनऊ एटीएस द्वारा बरेली से पकडे़ गए इनामुल का कश्मीर से कनेक्शन सामने आ चुका है और उसके साथी सलमान वानी ने भी कई कश्मीरी छात्रों के एडमिशन बागपत के इंस्टीट्यूट में कराए थे, जिसका खुलासा होने के बाद से शहर के संस्थानों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों को लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया था। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों द्वारा सरकार और सेना के खिलाफ की गई टिप्पणी से पता चलता है कि कश्मीर से आने वाले छात्रों के मन में देश विरोधी जहर घोला जा रहा है।
आतंकवादियों के स्लीपर सेल बन रहे कश्मीरी छात्र
कश्मीर से देश के दूसरे हिस्सों में जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की कम उम्र देखकर उनकी भावनाएं भड़काकर आतंकी उन्हें अपना स्लीपर सेल बना रहे हैं। बरेली में फिलहाल ऐसा मामला सामने नहीं आया है पर देश भर में आतंकी संगठन सेना तथा देश विरोधी मानसिकता बनाकर इन छात्रों का उपयोग अंदरूनी जानकारी जुटाने में कर रहे हैं। शिक्षा संस्थानों के छात्रावास में रह रहे छात्रों पर सामान्य तौर पर पुलिस और खुफिया अमले का शक नहीं जाता। यहां चेकिंग भी नहीं होती जिसका फायदा आसानी से उठाया जा सकता है।