ज्यादातर संपत्तियों के मुतवल्ली नहीं
उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के जिला कोऑर्डिनेटर नोमान अहमद का कहना है कि ज्यादातर वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली ही नहीं हैं। वर्ष 1987 में वक्फ संपत्तियों का गजट हुआ था। उसमें जिनका नाम मुतवल्ली के तौर पर दर्ज है, उनमें से कई मर चुके हैं। ज्यादातर वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली मौखिक तौर पर घोषित हैं। संपत्तियों के संबंध में बोर्ड की ओर से गठित कमेटियां बेहद सीमित संख्या में हैं।
सहायक सर्वे कमिश्नर (वक्फ) लालमन ने बताया कि वक्फ संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने की स्थिति में क्या होगा, यह केंद्र सरकार तय करेगी। पोर्टल पर संपत्तियों का विवरण दर्ज करने में वक्फनामा, चौहद्दी, खसरा-खतौनी, नक्शा की जरूरत पड़ रही है, जो मुतवल्लियों के पास नहीं हैं। कई संपत्तियों के मुतवल्ली के बारे में भी बोर्ड ने कोई जानकारी नहीं दी है।