बरेली। बरेली कॉलेज का आखिरी बार नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) मूल्यांकन वर्ष 2013 में हुआ था। इसमें कॉलेज को ए ग्रेड मिला था। नियमानुसार पांच साल बाद मूल्यांकन के लिए दोबारा आवेदन करना होता है पर अव्यवस्था का शिकार बरेली कॉलेज अब तक इसके लिए हिम्मत नहीं जुटा सका।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमानुसार संस्थान को नैक ग्रेड मिलने के पांच साल बाद दोबारा मूल्यांकन कराना होता है। वर्ष 2019 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध बरेली और मुरादाबाद मंडल के कई कॉलेजों ने नैक मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। बरेली कॉलेज में नैक की अवधि वर्ष 2017 में ही पूरी हो गई थी। उसके बाद अव्यवस्थाओं की वजह से महाविद्यालय की ओर से आवेदन नहीं किया गया। दस्तावेज तैयार करना तो दूर, इमारत के रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया गया। दरअसल, नैक मूल्यांकन में कॉलेज में संसाधनों की उपलब्धता, प्रदर्शन व शैक्षणिक रिपोर्ट भी देखी जाती है।
बरेली कॉलेज के शिक्षक संघ के सचिव प्रो. वीपी सिंह ने बताया कि वर्ष 2013 में कॉलेज को नैक मूल्यांकन में ए ग्रेड मिला था। उस समय मेरठ को छोड़कर आसपास के क्षेत्र में किसी के पास नैक ए ग्रेड नहीं था। कॉलेज को फिर से नैक में आवेदन करना चाहिए। इससे काफी हद तक महाविद्यालय की स्थिति में सुधार आएगा। वर्तमान में सुधार नहीं हुआ तो आगे चलकर मूल्यांकन कराने पर कॉलेज नैक भी क्वालिफाई नहीं कर पाएगा।
संस्थान चयन पर भी पड़ता है प्रभाव
12वीं के बाद विद्यार्थी किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले वेबसाइट पर नैक के बारे में चेक करते हैं। इसके बाद ही उसमें प्रवेश लेते हैं, लेकिन सात साल बाद भी बरेली कॉलेज नैक की स्थिति अपडेट नहीं कर सका है। अधिकांश छात्र वेबसाइट पर नैक ग्रेड देखकर ही कॉलेज में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में अनुमान लगा लेते हैं।
वर्जन
बरेली कॉलेज का नैक मूल्यांकन कराया जाएगा। कुछ समस्याओं के कारण इसमें देरी हुई है। इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। व्यवस्थाओं में भी आवश्यक सुधार किया जाएगा। -प्रो. ओपी राय, प्राचार्य, बरेली कॉलेज