बरेली। बरेली कॉलेज प्रशासन ने एलएलबी में फर्जी एडमिशन पर कार्रवाई को जांच के चक्रव्यूह में उलझा दिया है। एडमिशन के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर भारांक हासिल करने की बात सही साबित होने के बावजूद प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने मामले की जांच के लिए अब एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में डॉ. पूर्णिमा अनिल, डॉ. अनुराग मोहन और डॉ. संजीव सक्सेना को शामिल किया गया है। प्राचार्य का कहना है कि अब कमेटी की संस्तुति के आधार पर एडमिशन निरस्त करने और फर्जीवाड़ा करने वालों पर रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई होगी।
‘अमर उजाला’ ने बरेली कॉलेज में एलएलबी में दिव्यांग होने का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर एडमिशन लेने के मामले का खुलासा किया था। इसके बाद प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने 30 मेडिकल सर्टिफिकेट जांच को सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला के पास भेजे, जिनमें से नौ फर्जी साबित हुए। इसके बाद डॉ. अनुराग मोहन की जांच में इनमें से तीन सर्टिफिकेट लगाकर एडमिशन लेने की बात साबित हो गई। मगर एडमिशन निरस्त करने की बात आई तो प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा और मुख्य प्रवेश नियंत्रक डॉ. अनुराग मोहन के बीच इसे एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र साबित करने की होड़ शुरू हो गई। न मुख्य प्रवेश नियंत्रक ने कार्रवाई की और न ही प्राचार्य ने, लिहाजा अब तक एडमिशन निरस्त नहीं हुए। इधर यह मामला राजभवन और कुलपति तक पहुंचा तो सख्ती शुरू हुई। इस पर सोमवार को प्राचार्य ने मामले पर कार्रवाई की संस्तुति के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कॉलेज में चर्चा है कि 15 अक्तूबर को प्राचार्य का रिटायरमेंट है। वह इससे पहले किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते। इस वजह से ही इन फर्जी एडमिशन लेने वालों पर कार्रवाई में टालमटोल हो रही है।