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बरेली कॉलेज : व्यवस्थाएं डगमगाईं, क्लासरूम खाली, खेल मैदान गुलजार

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हर महीने की चार तारीख तक दर्ज करनी होगी विद्यार्थियों की उपस्थिति
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बरेली। बरेली कॉलेज में इन दिनों शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। शासन और कॉलेज प्रशासन की सख्ती के बावजूद विद्यार्थियों का रुझान कक्षाओं की तुलना में मैदान की ओर अधिक है। बुधवार को कॉलेज परिसर का नजारा कुछ ऐसा ही था। कक्षा में सन्नाटा पसरा रहा और मैदान विद्यार्थियों से गुलजार दिखे। कुछ कक्षाओं में इक्का-दुक्का छात्र-छात्राएं बैठे मिले। बाहर धूप का आनंद लेती विद्यार्थियों की टोलियां कॉलेज प्रशासन के दावों की पोल खोलती नजर आईं।

कॉलेज प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज कराना है। शासन के कड़े निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को हर महीने की चार तारीख तक विद्यार्थियों की उपस्थिति का डेटा पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य है। लेकिन जब छात्र क्लास में ही नहीं पहुंच रहे, तो शिक्षक उपस्थिति का कोरम कैसे पूरा करें, यह उनके लिए चिंता का विषय है। उपस्थिति कम होने की स्थिति में भविष्य में विद्यार्थियों को परीक्षाओं से वंचित किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल छात्र इस चेतावनी को गंभीरता से लेते नहीं दिख रहे।
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- शिक्षक भी कम नहीं... बायोमीट्रिक हाजिरी लगाकर दूसरे गेट से निकल जाते
व्यवस्थाओं की विसंगति केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं हैं। कॉलेज में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई फेस पंचिंग (बायोमीट्रिक उपस्थिति) मशीनें भी अब महज औपचारिकता बनकर रह गईं हैं। सूत्रों के अनुसार, कई शिक्षक सुबह कॉलेज पहुंचकर अपनी पंचिंग करते हैं और फिर परिसर से गायब हो जाते हैं। ड्यूटी के छह घंटे पूरे होने के समय वे दोबारा कॉलेज लौटते हैं, अपनी आउट पंचिंग दर्ज करते हैं और घर चले जाते हैं। इस तरह बिना कक्षाएं लिए ही कागजों पर ड्यूटी पूरी की जा रही है, जिससे नई व्यवस्था ताक पर है। संवाद
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- टाइम टेबल की दीवार बन रही परेशानी
जो विद्यार्थी पढ़ने की इच्छा लेकर कॉलेज आ रहे हैं, उनके सामने टाइम-टेबल की बड़ी दीवार खड़ी है। विशेषकर कला वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं का समय आपस में टकरा रहा है। बीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र मोहम्मद आफताब ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनकी इतिहास और अर्थशास्त्र की कक्षाएं एक ही समय पर निर्धारित हैं। ऐसे में उन्हें प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण विषय की पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। छात्रा नंदिनी और अन्य विद्यार्थियों ने भी इसी तरह की समस्या बताई। छात्रों का आरोप है कि इस संबंध में शिक्षकों से शिकायत भी की गई, लेकिन समाधान निकालने के बजाय उन्हें टाल दिया गया।
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