इसमें देशभर के रजवाड़ों और रईसों ने 80 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग दिया था। इनमें लॉर्ड रिपन और एओ ह्यूम भी शामिल रहे। तब वर्ष 1884 में बरेली कॉलेज फिर शुरू हुआ था। शुरुआत में कॉलेज की संबद्धता कलकत्ता विश्वविद्यालय से थी। वर्ष 1884 से यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ। वर्ष 1927 में आगरा विश्वविद्यालय और आखिर में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इसे जोड़ा गया।
रामपुर के नवाब ने दान में दी थी 110 एकड़ भूमि
1904-05 में कर्जन के शिक्षा अधिनियम के तहत बरेली कॉलेज के प्रबंध तंत्र को सरकार ने आगाह किया कि अगर कॉलेज अपना पृथक भवन बनाकर उसमें पढ़ाई शुरू नहीं करता तो अनुदान बंद हो जाएगा। पंडित प्रताप नारायण ने कॉलेज को बचाने का मोर्चा संभाला।
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धन जुटाया पर भूमि की जरूरत थी। प्रबंध तंत्र की मांग पर रामपुर के नवाब ने 110 एकड़ भूमि बरेली कॉलेज को दान में दी थी। 17 जुलाई 1905 को इसी परिसर में सभागार का शिलान्यास रुहेलखंड आगरा प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर जेम्स डिग्शलाट्स ने किया। वहीं, 17 जुलाई 1906 को भवन का उद्घाटन हुआ।