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बरेली में बवाल: माहौल बिगाड़ने की थी साजिश... पथराव के लिए छतों पर पहले से जमा थे पत्थर; इसलिए बिगड़ गई बात!

Mon, 24 Jul 2023 10:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

बरेली में माहौल बिगाड़ने की साजिश थी। पथराव के लिए छतों पर पहले से पत्थर जमा थे। खुफिया अमला माहौल भांपने में नाकाम हो गया। पुलिस बल भी कम था इसलिए बात बिगड़ गई।
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bareilly clash - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में कांवड़ियों के जत्थे पर पथराव अनायास ही नहीं हुआ। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति थी। इबादत स्थल में मौजूद लोगों के हाथ से लेकर घरों की छतों तक में पत्थर और बोतलें थीं। इसी से कांवड़ियों को निशाना बनाया गया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस बल की कमी और खुफिया अमले की नाकामी साफ नजर आई।
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गोपाल नगर गोसाई गौटिया से जोगी नवादा के वनखंडीनाथ शिवालय तक का रास्ता मिश्रित आबादी की संकरी गलियों से होकर गुजरता है। इबादत स्थल के आसपास पहले भी कांवड़ यात्रा को लेकर तनातनी हो चुकी है। बताते हैं कि इस घटनाक्रम के मुख्य सूत्रधार पूर्व पार्षद उस्मान अल्वी की भूमिका 2012 में भी थी। 

 

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तब भी वहां कांवड़ियों से मारपीट और उनको विदा करने आ रहीं महिलाओं से अभद्रता की गई थी। सपा सरकार में तत्कालीन पार्षद उस्मान के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ था। उसके बाद भी हर साल कभी कांवड़ के वाहनों की संख्या तो कभी डीजे की आवाज को लेकर तनातनी होती रही है।

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चूंकि पिछले सोमवार को इससे बड़ा जत्था इसी रास्ते से गुजारा जा चुका था। इसलिए इस बार पुलिस-प्रशासन बेहद मुतमइन था कि विरोध या बवाल नहीं होगा। थाना प्रभारी के साथ सीमित संख्या में पुलिसकर्मी थे। इस बीच पथराव हुआ तो पुलिस लोगों को समझाती ही रह गई। 

मौके से कांवड़िये दूसरी गलियों में भागे तो वहां छतों से भी पत्थरों और कांच की बोतलों से हमला किया गया। बचाव और जवाब में कांवड़ियों ने सड़क पर पड़े पत्थर उठाकर फेंके। फिर पुलिस की सुरक्षा में अपनी आबादी के घरों तक चले आए।


 

इबादत का समय गुजरा तो क्यों जुटी थी भीड़
कांवड़ यात्रा का नेतृत्व कर रहे संदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की चूक की वजह से यह घटना हुई। उनके जत्थे का वहां से निकलने का समय दोपहर डेढ़ बजे था। पुलिस ने उन्हें समझाया कि उसी समय इबादत के लिए लोग जुटते हैं। इसलिए थोड़ा देर से निकलें। तब वह लोग करीब ढाई बजे वहां से निकले थे। 

उन्होंने सवाल उठाया कि इस समय तक इबादत स्थल में लोगों की मौजूदगी की क्या वजह रही, यह समझ में नहीं आया। उन्हें लग रहा है कि साफतौर पर साजिश रची गई है। खुफिया अमला भी माहौल भांपने में नाकाम रहा। पुलिस ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि इबादत के बाद लोग क्यों रुके हुए हैं?

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दूसरा पक्ष बोला- जानबूझकर गुलाल उड़ाया
घटना के बाद जब दूसरी गली में प्रदर्शन चल रहा था, तब इबादत स्थल के बाहर दूसरे समुदाय के लोगों की भीड़ जुटी थी। उन लोगों का कहना था कि झांकी में शामिल हनुमान जी की मूर्ति पर नीचे से केसरिया गुलाल डाला जा रहा था जो पंखे की हवा के साथ ऊपर जा रहा था। इबादत स्थल के पास झांकी आते ही पंखे की हवा का रुख इधर कर दिया गया। गेट पर खड़े कई लोगों के ऊपर यह रंग चला गया तो वे भड़क गए। इसके बाद पथराव शुरू हो गया।

पलक झपकते ही घरों में पड़े ताले
जिन घरों की छतों से थोड़ी देर पहले पत्थर फेंके जा रहे थे, उनमें पलक झपकते ही ताले पड़ गए। थोड़ी देर बाद मौके पर पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने भी रूट मार्च किया। पुलिस ने हमलावरों के घरों में दबिश दी तो वहां कई दरवाजों पर ताले पड़े नजर आए।
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छतों पर तैनात हुई आरएएफ
घटना के बाद घनी आबादी वाले इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई। कई घरों की छतों पर पुलिस, पीएसी के साथ आरएएफ को भी तैनात कर दिया गया। पुलिसकर्मी गलियों में घूमकर लोगों को घरों में भेजते रहे।
 
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