मौके से कांवड़िये दूसरी गलियों में भागे तो वहां छतों से भी पत्थरों और कांच की बोतलों से हमला किया गया। बचाव और जवाब में कांवड़ियों ने सड़क पर पड़े पत्थर उठाकर फेंके। फिर पुलिस की सुरक्षा में अपनी आबादी के घरों तक चले आए।
उन्होंने सवाल उठाया कि इस समय तक इबादत स्थल में लोगों की मौजूदगी की क्या वजह रही, यह समझ में नहीं आया। उन्हें लग रहा है कि साफतौर पर साजिश रची गई है। खुफिया अमला भी माहौल भांपने में नाकाम रहा। पुलिस ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि इबादत के बाद लोग क्यों रुके हुए हैं?
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