सेना और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता से देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। वर्तमान में आंतरिक सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। डिजिटल युग में देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारियां ऑनलाइन हैं। ऐसे में साइबर हमलों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र विकसित करना होगा ताकि कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे। बुधवार को अमर उजाला की ओर से ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर आयोजित संवाद में इंटेलिजेंस ब्यूरो के विशेष निदेशक रह चुके पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने ये बातें कहीं। उन्होंने अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लोगों में कई भ्रांतियां हैं, जबकि देश व्यापक ‘सुरक्षा कवच’ से जुड़ा है। समय के साथ देश की सुरक्षा के मानक भी बदलते रहे। द्वितीय विश्वयुद्ध में जिस देश के पास सैन्य शक्ति अधिक थी, वह सर्वाधिक सुरक्षित माना गया। शीतयुद्ध शुरू होने पर आर्थिक मजबूती, यूरेनियम, गैस और तेल आदि की व्यापक उपलब्धता को सुरक्षा का आधार माना गया। 21वीं सदी की शुरुआत में पैरामिलिट्री फोर्स की उपलब्धता को वरीयता दी जाने लगी।
वर्तमान में आंतरिक सुरक्षा, साइबर हमलों सहित नए युग के अपराध की रोकथाम में सक्षम देश को सुरक्षित माना जा रहा है। डिजिटल हाईवे कनेक्टिविटी, सेटेलाइट मैपिंग, ड्रोन, जियो टैगिंग के दौर में आंतरिक सुरक्षा बड़ा सवाल है। महाशक्ति के रूप में स्थापित देश अब वाह्य सुरक्षा से ज्यादा खर्च आंतरिक सुरक्षा पर कर रहे हैं।
अब कश्मीर सुरक्षित, सेना हटाने पर मंथन
यशोधर्वन आजाद ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के मामले में कश्मीर का जिक्र पहले होता है। 1989-90 में कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ीं। सेना तैनात हुई तो 1995-96 में स्थिति काबू में आ गई। 2001 में फिर घटनाएं शुरू हुईं। साल 2010 से आतंकियों की तादाद कम होने लगी और 2020 में सरकार ने माना कि कश्मीर सुरक्षित है। सीआरपीएफ, पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती पर मंथन चल रहा है, ताकि सेना को देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात किया जा सके। वहीं, पाकिस्तान बार-बार यूएन (संयुक्त राष्ट्र) में पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) का मुद्दा उठाता रहा है। अबकी बार यूएन ने इसे नकार दिया। सरकार भी कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता मान रही है।
उभरती अर्थव्यवस्था का प्रमाण है जी-20 की मेजबानी
मुख्य वक्ता ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया के अन्य देशों से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है। जी-20 की मेजबानी मिलना इसका प्रमाण है। लिहाजा, इसके कोर इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त करना ही दुश्मन देशों का मकसद है। हथियारों से यह संभव नहीं है। देश से कई चीजें निर्यात और आयात हो रही हैं। आयात की जाने वाली डिजिटल सामग्री (मोबाइल, गैजेट्स, सीसी कैमरे) आदि की निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि तकनीक का दुरुपयोग न हो।