281 करोड़ से सड़क बनाने में हुए घोटाले की दबी जांच फिर शुरू
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शासन ने तलब किए रिकार्ड, अफसरों में मचा हड़कंप
बरेली। चार साल पहले 281 करोड़ की लागत से बने बरेली-बदायूं फोरलेन के निर्माण में बड़े पैमाने पर गोलमाल की लंबे समय से दबी जांच राष्ट्रपति भवन की दखलंदाजी के बाद एक फिर उखड़ गई है। शासन स्तर से नए सिरे से जांच का आदेश जारी होने के बाद मंडल से लेकर लखनऊ तक पीडब्ल्यूडी के अफसरों में हड़कंप मच गया है। शासन स्तर से पीडब्ल्यूडी से इस घोटाले से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब कर लिए गए हैं।
सपा के शासन में पीडब्ल्यूडी ने 2016-17 में बरेली से बदायूं तक 281 करोड़ की लागत से फोरलेन हाईवे का निर्माण कराया था। निर्माण पूरा होने के साथ ही इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने की शिकायतें शासन तक पहुंचीं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण आरोप यह था कि नई सड़क में पुराने मलबे का इस्तेमाल किया गया है। बिजली के पोल भी पुराने लगाए गए हैं। शासन स्तर से कार्रवाई नहीं हुई तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। पिछले साल हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से इसकी टीएसी जांच कराकर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया था मगर यह जांच पूरी नहीं होने दी गई। जांच समिति ने यह रिपोर्ट देकर जांच रोक दी कि शिकायतकर्ता ही नहीं मिल रहा है। कुछ समय पहले राष्ट्रपति भवन से यह जांच पूरी करने का आदेश आने के बाद शासन ने फिर इस प्रकरण की फाइल खोल दी है। बता दें कि यह जांच करीब दो साल पहले शुरू हुई थी लेकिन इसमें अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस बीच इसमें फंसे कई अधिकारी भी इधर से उधर हो चुके हैं।
16 जून को साक्ष्यों की जांच के लिए शिकायतकर्ता को बुलाया
शासन के संयुक्त सचिव अभय कुमार ने इस मामले की जांच के लिए पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता विकास एवं विभागाध्यक्ष और मुख्य प्राविधिक परीक्षक को नोटिस दिया है। इसमें जांच रिपोर्ट के तथ्यों की जांच के लिए 16 जून को रिकार्ड मांगे गए हैं। इसके अलावा इस मामले में सुनवाई के लिए शिकायतकर्ता को भी इसी दिन बुुलाया गया है।