एचआईवी से जूझ रहे नौजवानों के लिए बरेली का एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर नई जिंदगी शुरू करने का जरिया भी बन गया है। एआरटी सेंटर का काम अब सिर्फ दवाएं बांटना और परामर्श देना ही नहीं रह गया है बल्कि वह मैरिज सेंटर के रूप में भी काम कर रहा है। सेंटर पर जितने मरीज पंजीकृत हैं उन्हीं में से शादी योग्य के आवेदन लिए गए हैं। अब तक 13 लोगाें ने शादी करने में दिलचस्पी दिखाई है।
बरेली जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर चल रहा है। इसमें बरेली के अलावा शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत के मरीज पंजीकृत हैं। 2154 मरीजों में 1014 रोगी बरेली के हैं, बाकी अन्य जिलों के हैं। इनमें 99 बच्चे हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम है। 2154 में मरीजों में 1500 से अधिक युवा हैं। एआरटी सेंटर के डाटा मैनेजर मनोज कुमार बताते हैं कि सेंटर सिर्फ बरेली और आसपास के ही एचआईवी मरीजों के रिश्ते तय नहीं करता है, बल्कि देश भर के अन्य एआरटी सेंटर पर भी मरीजों के बायोडाटा भेजता है, जिनको बायोडाटा ठीक लगते हैं, वे स्थानीय एआरटी सेंटर से संपर्क कर हम लोगाें तक पहुंचते हैं। अभी तक 13 लोगों ने शादी के लिए अपने आवेदन दिए हैं। इनमें कुछ कॉलेज स्टूडेंट भी हैं। कुछ आवेदकों के अभिभावकों की बात भी कराई जा चुकी है, लेकिन अभी उनकी स्वीकृति नहीं मिली है।
धर्म और जाति आ रही है आड़े
एचआईवी मरीज और उनके परिवार वाले अब भी रूढ़िवादी सोच पर कायम हैं। सेंटर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव बताते हैं कि जितने भी मरीजों ने आवेदन किए हैं उनको जब दूसरे एचआईवी मरीजों से मिलाया गया तो धर्म और जाति की बात कहकर मना कर दिया गया। ऐसे में जल्दी रिश्ते नहीं बन रहे हैं। डॉ. संजीव का कहना है कि अब एचआईवी मरीजों की संतान में एचआईवी निगेटिव होता है, लिहाजा उनकी शादी का चलन बढ़ गया है।
हर महीने आ रहे हैं 50 नए रोगी
बरेली एआरटी सेंटर में हर महीने 30 से 40 नए रोगी आ रहे हैं। डाटा मैनेजर मनोज बताते हैं कि जब अक्तूबर 2012 में सेंटर खोला गया था तब यहां लखनऊ से ट्रांसफर 72 मरीज पंजीकृत हुए थे। अब यह संख्या 2154 है। नवंबर में ही 33 नए मरीज आए हैं।