बरेली। हवाई अड्डे पर जलभराव की दिक्कत खत्म करने के लिए ग्राउंड को दो से ढाई फुट तक ऊंचा कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए करीब सात करोड़ के टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। हवाई अड्डे के अंदर ड्रेनेज सिस्टम खुद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ही बनाएगा, जबकि बाहर के लिए करीब सवा दो करोड़ का काम जल निगम को करना है। हवाई अड्डे पर बारिश का पानी भरने से निर्माण कार्यों को नुकसान पहुंच रहा है।
करीब 18 हेक्टेयर जमीन पर तैयार हो रहे हवाई अड्डे की जमीन का काफी हिस्सा ऐसा भी था, जो पहले भट्ठे की जमीन हुआ करती थी। इससे यह जमीन हाईवे से काफी नीचे थी। हवाई अड्डे के लिए भरान तो शुरू हुआ, लेकिन अभी भी ग्राउंड हाईवे से काफी नीचे है। इसलिए ग्राउंड पर बारिश का काफी पानी भर रहा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि हवाई अड्डे के ग्राउंड को दो से ढाई फुट तक ऊंचा किया जाना जरूरी है। प्लानिंग यह बनाई गई है कि टैक्सी-वे और एप्रेन को जितनी ऊंचाई दी गई है, ग्राउंड को भी उतने ही लेवल पर ऊंचा होना चाहिए। तभी हवाई अड्डे पर भरने वाले पानी को बाहर निकाला जा सकता है। इस काम के लिए करीब सात करोड़ का कांट्रेक्ट एक निजी कंपनी को देने की कवायद शुरू कर दी गई है। अफसरों ने बताया कि हवाई अड्डे के अंदर का ड्रेनेज सिस्टम भी बनाया जाएगा। यह काम खुद प्राधिकरण कराएगा, जबकि हवाई अड्डे के बाहर नाला बनाने के लिए जल निगम के अधिकारियों से बात हो रही है। यह काम भी जल्द शुरू होगा।
शासन में पेच कसने के बाद अब अफसर दिखा रहे फुर्ती
हवाई अड्डे का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। कुछ दिन पहले शासन ने अधिकारियों को बुलाकर इसकी गहन समीक्षा की थी। यहां से विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मदन कुमार ने शासन को हवाई अड्डे की प्रगति रिपोर्ट सौंपी थी। इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने हवाई अड्डे के काम में तेजी दिखानी शुरू कर दी है।
हवाई अड्डे के परिसर को जब तक ऊंचा नहीं किया जाता, जलभराव की समस्या बनी रहेगी। ठेका देकर इस काम को जल्द शुरू कराया जा रहा है।
-राजीव कुलश्रेष्ठ, संयुक्त महाप्रबंधक, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण