मिनी बाईपास पर बन रही अवैध कॉलोनी में सड़क का निर्माण भी रुकवाया
बरेली। रसूखदार लोगों की कारोबारी इमारतों पर शुक्रवार को बीडीए ने बड़ी कार्रवाई की। स्टेडियम रोड पर दो साल से आवासीय भवन में 21 डाउन-टाउन बार एंड रेस्टोरेंट के साथ बगैर नक्शा मंजूर कराए बनाए गए दो बड़े बरातघर मेफेयर लॉन और लावण्या मैरिज लॉन को भी सील कर दिया गया। इसके साथ एक अवैध कॉलोनी में बनाई जा रही सड़क का निर्माण भी रुकवा दिया गया।
बीडीए उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने बताया कि स्टेडियम रोड पर 21 डाउन-टाउन बार एंड रेस्टोरेंट काफी समय से जिस इमारत में चल रहा था, उसका बीडीए आवासीय भवन के तौर पर नक्शा स्वीकृत कराया गया था। बार के मालिकों ने इतने लंबे समय के बाद भी व्यावसायिक भवन के तौर पर उसका नक्शा मंजूर नहीं कराया न ही कंपाउंडिंग कराई। शुक्रवार को बीडीए ने बार बंद कराकर इमारत को सील कर दिया। इसके अलावा डोहरा रोड पर चल रहे बरातघर मेफेयर लॉन और लावण्या रिसोर्ट का बीडीए से नक्शा ही स्वीकृत नहीं कराया गया था। इस कारण इन दोनों बरातघरों को भी सील कर दिया गया।
मिनी बाईपास पर सैदपुर हाकिंस में बगैर मानचित्र स्वीकृत कराए चार हजार वर्गमीटर जमीन पर कॉलोनी का निर्माण कराया जा रहा है जहां कई दिनों से सड़क बनाने के लिए मिट्टी और पत्थर डाले जा रहे थे। बीडीए ने सड़क का निर्माण बंद कराकर कॉलोनी विकसित करा रहे मधुर अग्रवाल और विष्णु अग्रवाल को नोटिस दिया है। बीडीए की कई व्यावसायिक इमारतों पर एक साथ कार्रवाई से शुक्रवार को शहर में खलबली का माहौल रहा।
आवासीय भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ चलेगा अभियान
बीडीए उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने बताया कि शहर में तमाम आवासीय भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। जल्द ही इन सभी भवनों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ अगर शहर में कहीं भी बगैर नक्शा पास कराए कोई निर्माण कार्य किया जा रहा है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
खेल: आवासीय इस्तेमाल की शर्त पर कंपाउंडिंग कर फिर खुलवा दिया बार
बरेली। स्टेडियम रोड पर करीब दो साल पहले आवासीय इमारत में 21 डाउन-टाउन बार शुरू करने का मामला काफी दिन सुर्खियों में रहा था। तत्कालीन बीडीए उपाध्यक्ष ने इस बार के खिलाफ पहले तो काफी दबाव बनाया लेकिन फिर कागजी खानापूरी करके फिर उसके आवासीय भवन में चलने का रास्ता साफ कर दिया। 21 डाउन-टाउन बार जिस इलाके में चल रहा है, वह आवासीय है। खुद उसकी इमारत का नक्शा भी आवासीय श्रेणी में ही स्वीकृत कराया गया था। तत्कालीन बीडीए उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पांडेय ने इस इमारत को सील करा दिया था लेकिन कुछ ही दिनों बाद आठ लाख रुपये का शुल्क जमा कराकर इस शर्त पर कंपाउंडिंग करा दी गई कि इमारत का भविष्य में इस्तेमाल आवासीय तौर पर ही किया जाएगा। कंपाउंडिंग होने के बाद सील खुलते ही इस इमारत में फिर बार शुरू कर दिया गया। इसके बाद मामला फिर उछला लेकिन बीडीए उपाध्यक्ष ने बगैर एनओसी बार का लाइसेंस दे दिए जाने का ठीकरा आबकारी विभाग के सिर फोड़कर पल्ला झाड़ लिया और कोई कार्रवाई नहीं की। जवाब में आबकारी विभाग ने लाइसेंस देने के लिए एनओसी की अनिवार्यता से ही इनकार कर दिया। इस मामले में कमिश्नर से भी शिकायत की गई लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ।