बैंकों के विलय से बेरोजगार होगी, ग्राहक सेवा भी चौपट होगी
-बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार की नीति का किया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बैंकों के विलय के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने पीएनबी सिविल लाइंस शाखा में एकत्र होकर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। बैंकों का विलय करना न बैंकों के हित में है और न ही इससे जनता को ही कोई फायदा मिलने वाला है। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की इस नीति के खिलाफ कर्मचारी अपना विरोध जारी रखेंगे। इधर, प्रभा सिनेमा हाल के पास भी बैंक कर्मचारियों ने पीएनबी शाखा पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
धरना प्रदर्शन के दौरान संयोजक दिनेश सक्सेना ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन से बैंक विलय का आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि बैंकों के विलय देश को अर्थव्यवस्था को नुकसान ही होगा। पिछले विलय के अनुभव बताते हैं कि विलय न तो देश के हित में है और न ही कर्मचारियों के। बैंक यूनियन के नेता संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों के और महिला बैंक के विलय के बाद करीब सवा चार सौ बैंक शाखाएं बंद हो चुकी हैं। इसकी वजह से हजारों कर्मचारियों को वीआरएस देकर बाहर कर दिया गया है और रोजगार के नए रास्ते भी बंद हो गए हैं। कर्मचारी नेता सुनील मित्तल ने मर्जर को गैर जरूरी बताया हुए कहा कि जरूरत इस बात की है कि बैंक घर-घर पहुंचे। विलय से तमाम शाखाएं बंद होंगी तो ग्राहक सेवाएं भी प्रभावित होंगी। पंकज शर्मा ने कहा कि बैंकों के विलय से बेरोजगारी और ज्यादा बढ़ जाएगी। इस मौके पर पीके माहेश्वरी, अरुण कुमार, मलिक सिंह कलरा, रमीज, नावेंद्र, रवि आनंद, वासुदेव, पीपी सिंह, प्रतिष्ठा सिंघल सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।