आज से दो सप्ताह तक जिले की 450 बैंकों में करेंसी संकट बना रहेगा। जिले के करीब 54 हजार केंद्रीय, राज्य, सेना के कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों का वेतन तथा पेंशन उनके खातों में पहुंचने लगा है। इसके अलावा तमाम प्रइवेट संस्थानों के कर्मचारियों का वेतन भी खातों में ही जाता है। जिसे वे एक दो दिन बाद निकालना शुरू करेंगे। बैंक प्रबंधन परेशान हैं कि इन हालात में करेंसी के संकट से कैसे निपटा जाए। सभी बैंक शाखाओं के प्रबंधक उच्च अधिकारियों से अधिक से अधिक कैश मुहैया कराने का अनुरोध कर रहे हैं। अगर दो दिन कैश का फ्लो नहीं हुआ तो स्थिति खराब हो सकती है।
28 नवंबर से आज तक सेना, केंद्र सरकार, आईटीबीटी, रेलवे तथा अन्य स्टाफ का 30 नवंबर तक वेतन खातों में पहुंच गया है। शिक्षक, निकाय और राज्य सरकार के कर्मचारियों का वेतन एक से 12 दिसंबर के बीच खातों में पहुंच जाएगा। इस राशि में से करीब 50 फीसदी रकम दिसंबर के महीने में घरेलू खर्च के लिए निकालते हैं। इस बार तो ज्यादा रकम निकालेंगे, क्योंकि 500 और एक हजार के पुराने नोट बैंकों में जमा हो गए हैं। घरों में सिर्फ 100 और 50 के कुछ ही नोट रह गए हैं।
स्टेट बैंक, बैंक आफ बड़ौदा सहित जिले की सभी बैंकों के प्रबंधक करेंसी की मांग उच्च अधिकारियों से कर चुके हैं। इन सभी को दिल्ली और लखनऊ से यही संकेत मिले हैं कि 500-500 के नोट की नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में मिलने तक खाता धारकों को साधने की कोशिश करें। जिला बैंक कर्मचारी यूनियन जिला सचिव दिनेश सक्सेना बताते हैं कि सबसे ज्यादा सरकारी खाता प्रबंधन एसबीआई करता है। आईसीआईसीआई, एक्सिस, एचडीएफसी निजी बैंकों में भी कई विभाग खाते चला रहे हैं। इनका कहना है कि बैंकों में कैश स्थिति दयनीय है। आरबीआई हर दिन पर्याप्त कैश देने का वादा करती है, 10 फीसदी भी धन नहीं मिल रहा है।
इनको चाहिए वेतन
आईटीबीटी, सेना और वायु सेना का स्टाफ 9000
प्राइमरी से विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मी 11000
राज्य कर्मचारी 12000
केंद्र सरकार और रेलवे 8000
रिटायर कर्मचारी 4000
10 से 30 नवंबर तक का हाल
बैकों में जमा राशि 50 अरब
निकासी हुई 2.25 अरब
निकासी नोट वार
दो हजार के नोट -1. 20 अरब
पांच सौ के नोट - 05.00 करोड़
100 से एक के नोट - 01.00 अरब
बड़ौैदा ग्रामीण बैंक खाली
जिले में बड़ौदा ग्रामीण बैंक की 81 शाखाओं का बुरा हाल है। इन बैंक शाखाओं में बुधवार को कैश नहीं था तो इनके अधिकारियों ने डीएम से मिलकर नियमित कैश उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। करीब दो घंटे तक डीएम से वार्ता के बाद दो करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। यह रकम दोपहर बाद से बैंक शाखाओं में बांटी गई जो कि गुरुवार दोपहर तक खत्म हो जाएगी। इन बैंकों में भी ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों के खाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की इन बैंकों से किसान भी रबी फसल की बुवाई के लिए धनराशि निकालने के लिए लाइन में लगे हुए हैं। इनको बैंक प्रबंधक दो से चार हजार रुपये कैश देकर संतुष्ट करने की कोशिश क र रहे हैं। दूसरी ओर किसानों का कहना है कि इतनी कम रकम से खेतों की जुताई, बुआई, खाद, बीज आदि की व्यवस्था कैसे हो। यह रकम व्यवहारिक नहीं है।
बैंकों में कैश खत्म, मायूस लौटे ग्राहक
बरेली। महीने के आखिरी दिन बैंक कैश किल्लत से जूझते रहे। अधिकांश बैंकों में कैश न होने के कारण निकासी के लिए आए ग्राहकों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। जिन बैंकों में कैश था तो उन्होंने ग्राहकों को कुछ न कुछ रकम थमाकर साधने का प्रयास किया।
एसबीआई की 24 शाखाओं ने ग्राहकों को 10 हजार रुपये थमाए। जबकि पीएनबी, ओबीसी, ग्रामीण बैंक, बड़ौदा बैंक आदि की अधिकांश शाखाओं में कैश न होने के कारण ग्राहकों को वापस लौटना पड़ा। इन बैंकों के प्रबंधकों ने आश्वासन दिया है कि एक दो दिन में स्थिति सामान्य होने पर कैश उपलब्ध करा दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर जिले के 525 एटीएम में से 450 से अधिक एटीएम कैश न होने के कारण बंद हो गए। जिन एटीएम में कैश था वो दोपहर बाद हांप गए।