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भगवान विष्णु। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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देवशयनी एकादशी आज, अब 25 नंवबर से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

बरेली। देवशयनी एकादशी बुधवार को है जिसके बाद सनातन धर्म के वैवाहिक कार्यक्रमों पर करीब पांच महीने के लिए रोक लग गई है। ज्योतिषियों के मुताबिक अब सभी मांगलिक कार्य 25 नवंबर देवोत्थान एकादशी से शुरू होंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक देवशयन का योग इस बार सिद्ध योग में बन रहा है।
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पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तक वर्षा काल के चार महीनों में भगवान विष्णु शयन करते हैं। यह हरि की आराधना का पवित्र समय होता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जो व्यक्ति सिर्फ दूध पीकर चातुर्मास में भगवान श्रीकृष्ण का व्रत रखते हैं वे प्रचुर मात्रा में सुख भोगकर परम शांति को प्राप्त करते हैं। इसके अलावा जो मनुष्य अपनी प्रिय वस्तु श्रीनारायण के लिए प्रयत्न पूर्वक त्याग करता है, उसे वह वस्तु अक्षय रूप में प्राप्त होती है।

इन कार्यों का निषेध

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ शंखधार के मुताबिक देवशयनी और देवोत्थान एकादशी के बीच मांगलिक कार्यों के अलावा कुछ और कार्य भी निषिद्ध हैं। मधुर स्वर के लिए गुड़ नहीं खाना चाहिए और दीर्घायु या पुत्र और पौत्रादि की प्राप्ति के लिए तेल का त्याग करना चाहिए। वंश वृद्धि के लिए नियमित दूध का सेवन किया जाए। पलंग पर शयन छोड़ देना चाहिए। शहद, मूली, परवल और बैंगन भी न खाएं। किसी और का दिया दही-भात भी न खाएं। देव विष्णु की विशेष साधना से विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। ओम नमो भगवते वासुदेवाय का अनुष्ठान करने से किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए उपयुक्त समय है।

अब वैवाहिक कार्यक्रम 25 नवंबर से शुरू होंगे। इन चार महीनों के बीच शादी-विवाह के लिए सरकार की नई गाइडलाइन भी आने की संभावना है। इसके बाद सहालग से जुड़े कारोबारियों को राहत मिलेगी। - पंडित राकेश पांडे, ज्योतिषाचार्य

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