शहर में घनी आबादी के बीच पतंगबाजी होती है। पतंगबाजी में चीनी मांझे का भी इस्तेमाल किया जाता है। नायलॉन और कांच व लोहे के चूरे से बना यह मांझा खतरनाक होता है। इस वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। कई घायल भी हो चुके हैं। पक्षी भी हादसे का शिकार हुए हैं।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
- 26 सितंबर 2024 को कोहाड़ापीर पुल पर पिता महेंद्र गुप्ता के साथ बाइक पर बैठकर जा रहा तीन साल का बेटा अथर्व उर्फ चीकू चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया। मांझा बच्चे के चेहरे पर लिपट गया जिससे उसकी नाक और आंख पर गहरे घाव हो गए। उसे पिता ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया।
- 24 अगस्त 2024 को द्वारकापुरम कॉलोनी, बदायूं रोड निवासी शिक्षक नेता विनोद कुमार चीनी मांझे की चपेट में आ गए थे। मांझे से उनकी गर्दन के साथ ही उनकी अंगुली में भी जख्म हो गया था।
- नौ मई 2024 को कोतवाली में तैनात दरोगा महेश चौधरी मांझे की चपेट में आ गए। वह महादेव पुल से गुजर रहे थे कि मांझा उनकी गर्दन में लिपट गया। साथियों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
- जुलाई 2023 में राजीव नगर कॉलोनी निवासी सचिन की ढाई माह की बेटी शिवांशी मांझे से घायल हो गई। सचिन की पत्नी नीतू जब घर की छत पर बेटी को गोद में लेकर टहल रही थीं, तब ये घटना हुई।
- वर्ष 2021 में फतेहगंज पश्चिमी के कपड़ा व्यापार मंडल के महामंत्री ताहिर रजा नूरी बरेली आते वक्त मिनी बाईपास पर गले में चाइनीज मांझा फंसने से लहूलुहान हो गए थे। इसी दिन मढ़ीनाथ निवासी व्यापारी शिवा गुप्ता मुखर्जी अस्पताल के पास चाइनीज मांझे की चपेट में आए और उनकी नाक पर गहरे घाव हो गए।