बरेली। शराफत मियां का कुल, जुलूसे मोहम्मदी और अयोध्या का फैसला.. शुक्रवार रात परिस्थितिजन्य आशंकाओं ने तनाव का जो अप्रत्यक्ष वातावरण बनाया, उसमें सिर्फ प्रशासन ही नहीं बल्कि शहरवासियों के लिए भी शहर की सांप्रदायिक सद्भाव की रिवायत को कायम रखना बड़ी चुनौती थी। बरेली के नागरिकों ने अमन का परचम फहराकर इस चुनौती पर कामयाबी हासिल कर ली। रात भर के तनाव से उबरकर शनिवार को शहर फिर अपने रंग में नजर आया।
अयोध्या पर शनिवार को फैसले आने की खबर जब शुक्रवार शाम आई तो शहर का माहौल एकबारगी असहज सा दिखने लगा, मगर बरेली में रची बसी गंगा-जमुनी संस्कृति ने सुबह फैसला आने तक सब कुछ सामान्य कर दिया। भले ही दो बार इस शहर ने दंगों का दंश झेला हो, लेकिन शनिवार को अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच हजरत शाह शराफत मियां के उर्स का कुल भी हुआ और जुलूसे मोहम्मदी भी निकला। हजरत शाह शराफत मियां का यहां चार रोजा उर्स चल रहा था। इसमें देश विदेश के हजारों नागरिक शिरकत कर रहे थे। शनिवार को कुल होना था। लिहाजा रात में अयोध्या पर फैसला आने की खबर से दरगाह के लोगों ने एहतियाती कदम उठाते हुए आसपास जिलों के अकीदतमंदों को यह संदेश भेज दिया कि वे कुल में न आएं और अपने शहर में ही कुल मना लें। इसी कड़ी में शनिवार पूर्वान्ह 11 बजे होने वाले कुल का समय भी बदल कर फैसला आने से पहले ही कुल की रस्म को पूरा कर दिया, ताकि जायरीन अपने घरों को जल्द से जल्द पहुंच जाएं।
इसके अलावा ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर पुराना शहर में जुलूसे मोहम्मदी भी निकलना था। इसके आयोजक भी रात फैसले की खबर से असमंजस में थे, परंतु जुलूस की तैयारी पूरी कर चुके थे। लिहाजा उन्होंने दोपहर तक माहौल को साजगार देखते हुए शाम को अपने निर्धारित समय पर शान-ओ-शौकत से जुलूस निकाला। इसका रास्ते में हमेशा की तरह हर मजहबो मिल्लत के लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। किसी ने फूल बरसाए, दस्तार की तो किसी ने मिठाइयां और गिफ्ट बांटे। इस तरह शुक्रवार रात से शनिवार दोपहर तक तनाव में गुजरा शहर शाम को फिर अपने रंग में नजर आया।