फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कारसेवा अयोध्याः आधी रात पुलिस उठाने आई तो फटकार कर कहा- सुबह आना.. 7 बजे जेल गए

विज्ञापन
विज्ञापन

रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान ट्रेन रोकने पर हुई थी गिरफ्तारी

विज्ञापन

राजवीर सिंह
पूर्व सांसद

बरेली। रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान शहर में पहली बड़ी गिरफ्तारी तत्कालीन विधायक डा.ॅ दिनेश जौहरी की हुई थी और इसी के साथ भाजपा के दूसरे प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी का भी सिलसिला शुरू हो गया। अगले ही दिन इसके बाद आंवला से पहली बार सांसद चुने गए राजवीर सिंह की गिरफ्तारी के लिए उनके आवास पर रात में साढ़े तीन बजे छापा मारा गया। राजवीर सिंह ने पहले तो पुलिस को हड़काया, फिर सुबह सात बजे आने को कहा। पुलिस ने इसके बाद उन्हें सात बजे ही गिरफ्तार किया।
पूर्व सांसद उस समय पटेल चौक के पास अपने आवास पर रहते थे। राजवीर सिंह उस समय बड़े नेताओं में शुमार थे। आडवाणी की गिरफ्तारी के दूसरे दिन उनके निवास पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने तड़के होने से पहले जब उनके घर पर दबिश दी, तब वह सोए हुए थे। पुलिस ने पहले तो दीवार फांदकर घर में घुसने की कोशिश की, फिर दरवाजा खटखटाकर उन्हें उठाया और बताया कि वह उन्हें गिरफ्तार करने आई है। इस पर सांसद बिगड़ गए। उन्होंने पुलिस को सुबह सात बजे आने को कहा लेकिन पुलिस फिर भी उनके घर से नहीं टली और दरवाजे पर ही डेरा जमाकर बैठ गई। राजवीर सिंह बताते हैं कि वह 24 अक्टूबर 1990 को गुरुवार का दिन था। पुलिस को डर था कि वह चुपचाप घर से निकल सकते हैं इसलिए उनके कहने के बाद भी घर से नहीं टली। सुबह वह जल्दी उठकर तैयार हुए और नाश्ता करके पुलिस वालों को बुलाया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके कुछ समर्थकों के साथ गिरफ्तार किया।

आज के धुरविरोधी भगवत तब संतोष के साथ गए थे जेल

संतोष गंगवार
विज्ञापन

तत्कालीन सांसद
बरेली। सियासत में कब और कहां किसकी राह जुदा हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और सपा की सरकार में मंत्री रहे भगवत सरन गंगवार की राहें भी वक्त के साथ अलग हो गईं लेकिन एक वक्त था, जब रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए दोनों ने साथ मिलकर आंदोलन किया था। 29 साल पहले इस आंदोलन के दौरान दोनों नेता एक साथ नवाबगंज में प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार किए गए थे और फिर शाहजहांपुर की बच्चा जेल में दो सप्ताह तक साथ रहे थे।
1990 में रथयात्रा लेकर निकले तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद कारसेवकों में उबाल आ गया था। बरेली जिले में भी जोरदार आंदोलन हुआ और पहली बार सांसद बने संतोष गंगवार भी इसमें पूरे दमखम से कूद गए थे। उन्होंने इस दौरान मीरगंज, नवाबगंज में चक्का जाम किया था और बरेली में ट्रेन भी रोकी थी। नवाबगंज में आंदोलन करते हुए उन्होंने 81 लोगों के साथ रास्ता जाम किया था और इस दौरान तत्कालीन भाजपा नेता भगवत सरन गंगवार और राजेंद्र शुक्ला के साथ गिरफ्तार किए गए थे। इससे पहले उन्होंने सहयोगी नेताओं के साथ ट्रेन रोको आंदोलन भी चलाया था।
प्रशासन ने संतोष गंगवार को गिरफ्तार कर भगवत सरन गंगवार के साथ शाहजहांपुर की बच्चा जेल भेज दिया था। उन्होंने वहां पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन तेज करने की योजना तैयार की। यहां से दो सप्ताह बाद ये सभी नेता रिहा हुए। संतोष गंगवार ने बताया कि 24 अक्टूबर 1992 को उन्होंने जेल भरो आंदोलन बरेली में चलाया था, इस दौरान बाजार भी बंद हुए। जो पहले जोश था वही आज भी कार्यकर्ताओं में है। केंद्रीय मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुछ भी बोलने मना कर दिया।

कारसेवकों की भर्ती करने के अभियान में जुटे थे विधायक

डॉ. दिनेश जौहरी
पूर्व मंत्री
बरेली। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा शुरू होते ही अयोध्या में कारसेवा के लिए शहर-शहर भर्ती भी शुरू कर दी गई थी। बरेली में इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन नगर विधायक डॉ. दिनेश जौहरी के सुपुर्द की गई थी। इसी दौरान सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश में गिरफ्तारियां शुरू हुईं तो बरेली में पहला नंबर विधायक डॉ. दिनेश जौहरी का ही आया। पुलिस ने उन्हें सुबह छह बजे घर की दीवार फांदकर उठा लिया और साथ ले गई।
विज्ञापन

बिहार के समस्तीपुर में 23 अक्टूबर 1990 को आडवाणी को रथयात्रा रोककर गिरफ्तार किया गया और इसके साथ उत्तर प्रदेश में भी रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों की धरपकड़ शुरू कर दी गई। बरेली में भी बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू गई। अक्टूबर 1990 में ही डॉ. जौहरी ने अपने आवास पर ही कारसेवक भर्ती केंद्र खोला था इसलिए सबसे पहला नंबर उन्हीं का आया। आडवाणी की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने उन्हें सूचीबद्ध कर लिया। डॉ. जौहरी ने बताया कि वे बुधवार सुबह अपने आवास पर थे। देशभर में कारसेवकों की भर्ती के साथ ही उनकी धड़ पकड़ भी हो रही थी। जैसे ही आडवाणी पकड़े तब पुलिस प्रशासन के निशाने पर वे भी आए गए। सुबह छह बजे ही पुलिस उनके घर पहुंची। गेट बंद था, इसलिए दीवार फांद कर पुलिस वाले घर में घुस गए। उस समय कुछ कार्यकर्ता पहले से ही मौजूद थे, पुलिस ने गिरफ्तार किया तो लोगों ने तिलक लगाकर विदा किया था। इसके बाद कई दिनों गिरफ्तारियां होती रहीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें