युवाओं को भड़काकर कर रहा था जेहाद और आतंकी संगठनों के लिए प्रशिक्षण देने की बातें
लखनऊ एटीएस ने गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से 10 दिन का रिमांड लिया, भाई को भी साथ ले गई
बरेली। सोशल साइट्स के जरिए युवाओं में आतंक का जहर घोलने की कोशिश कर रहे बरेली के इनामुल हक को यूपी एटीएस ने धर दबोचा है। लखनऊ एटीएस ने बरेली यूनिट की मदद से इनामुल को मंगलवार रात कटघर एरिया में स्थित उसके घर से धर दबोचा। एटीएस उसके भाई को भी पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है। एटीएस ने लखनऊ एटीएस थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया और पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड पर ले लिया है। एटीएस और खुफिया एजेंसियां उससे पूछताछ करके उसका नेटवर्क खंगालने की कोशिशों में जुटी हैं।
इनामुल की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने गुरुवार शाम जारी रिलीज में कहा है कि एटीएस को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि मोहम्मद शोएब उर्फ अबू मुहम्मद अल हिंदी नाम का एक व्यक्ति पूरी तरह कट्टरपंथी है। वह नौजवानों को जेहाद के लिए प्रेरित करके आतंकवादी संगठनों के लिए भर्ती करने का प्रयास कर रहा है। इस व्यक्ति की लोकेशन बरेली में थी। लखनऊ एटीएस ने एटीएस की बरेली यूनिट के साथ मिलकर इस सूचना को विकसित किया तो पता चला कि मोहम्मद शोएब का असली नाम पता मोहम्मद इनामुल हक पुत्र नुल हक निवासी डॉ. रियाज कालोनी, नियर तिलक इंटर कॉलेज, कटघर बरेली है। सूचनाएं जुटाने के बाद एटीएस नेे मंगलवार रात करीब नौ बजे डॉ. रियाज कालोनी में छापा मारकर इनामुल को दबोच लिया। उसके मोबाइल व मौके से मिले दूसरे दस्तावेजों को भी एटीएस ने कब्जे में ले लिया। इनामुल के छोटे भाई मुनीर को भी एटीएस अपने साथ ले गई। हालांकि मुकदमे और गिरफ्तारी में मुनीर को फिलहाल कहीं कोई जिक्र नहीं है।
लखनऊ ले जाने के बाद एटीएस और खुफिया एजेंसियों ने इनामुल से कई चरणों में पूछताछ की। इनामुल की सोशल मीडिया पर गतिविधियों पर नजर रखने के बाद एटीएस इस नतीजे पर पहुंची कि इनामुल जेहादी विचारधारा से प्रभावित है और युवाओं को भड़काकर उन्हें जेहाद के लिए प्रेरित कर रहा है। साथ ही उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित करने की भी बातें कर रहा है। उसके फेसबुक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम आदि एकाउंटस का स्टडी करने के बाद एटीएस को काफी तादाद में अलकायदा का प्रकाशित साहित्य मिला। उसके मोबाइल फोन में भी अलग से अलकायदा का साहित्य था। यूपी एटीएस का दावा है कि इनामुल हक ने पूछताछ के दौरान अपने जेहाद के प्रति लगाव और दूसरे लोगों को इसके लिए उत्प्रेरित करने की बात स्वीकार भी की है।
एटीएस के खुलासे के बाद इनामुल के घर पर जुटा मजमा, पुलिस भी पहुंची
बरेली। एटीएस के लखनऊ में खुलासे के बाद इनामुल के कटघर स्थित घर के सामने काफी मजमा लग गया। लोग शिक्षित परिवार से जुड़े इनामुल हक के आतंकी गतिविधियों से जुड़ाव पर हैरान थे। मीडिया का जमावड़ा लगा तो पुलिस भी पहुंच गई।
कटघर में इनामुल का करीब तीस साल पुराना मकान है। करीब सवा सौ वर्ग गज के इस मकान की एक दुकान में डॉ. रियाज प्रैक्टिस करते हैं। खुलासे के बाद मीडिया और पुलिस को देखकर डॉ. रियाज घबरा गए। उन्होंने और पड़ोसियों ने बताया कि इनामुल हक के पिता नूरुल हक पंतनगर विवि में कर्मचारी थे। उनकी मौत 2007 में हो गई। इसके बाद इनामुल के बड़े भाई फरीद को वहां मृतक आश्रित में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनाती मिल गई। तब से फरीद, मां नाजरा और बहन के साथ विवि परिसर में बने आवास में रहता है।
करीब तीन साल पहले इनामुल और मुनीर पंतनगर से यहां अपने पैतृक घर में आकर रहने लगे। डॉ. रियाज से मिलने वाले किराये के तीन हजार रुपये महीने दोनों भाई रखते थे। पंतनगर से भी खर्चे को रुपये मिल जाते थे। लोगों ने बताया कि इनामुल कोई काम नहीं करता था। पूरा दिन मोबाइल पर ही गुजारता था। वह इंटर में फेल हो गया था। इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। वहीं मुनीर पढ़ाई के बाद एक रेडिमेड गारमेंट्स शोरूम में नौकरी करने लगा। शिक्षित परिवार के युवक के आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने का खुलासा होने से लोग हैरत में थे। वह इनामुल को सनकी और घमंडी बता रहे थे। उनका कहना था कि इनामुल लोगों से बेहद जरूरत पर ही बात करता था।
बोलेरो से आई एटीएस, पड़ोसी को दे गई चाबी
एटीएस मंगलवार रात नौ बजे के करीब ग्रे कलर की बोलेरो से आई। सादा कपड़ों में टीम के सदस्य धड़धड़ाते हुए घर में घुस गए। उस वक्त डॉ. रियाज दुकान बंद करने जा रहे थे। टीम पांच मिनट में ही बाहर निकल आई और दोनों भाइयों को गाड़ी में बैठाकर ले गई। टीम ने राह निकलते हमीद से पूछा कि यहीं रहते हो। उन्होंने हां कहा तो उन्हें इनामुल के घर की चाबी थमा दी। दोनों को ले जाते हुए कई लोगों ने देखा पर वे ये नहीं समझ पाए कि कहां की पुलिस है और इन दोनों का अपराध क्या है? उसकी मां और भाई को भी सूचना दी गई पर वे लोग नहीं आए। मुनीर गुरुवार रात भी लखनऊ स्थित एटीएस कार्यालय में मौजूद था। टीम ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उसे छोड़ने की बात कही जा रही है।
इबादत से दूर है इनामुल, लोग कहते थे देवबंदी हो गया
इनामुल का परिवार सुन्नी मुस्लिम है पर वह नमाज और इबादत में यकीन नहीं करता था। छोटा भाई मुनीर जहां पांचों वक्त का नमाजी है, वहीं इनामुल एक बार भी नमाज पढ़ने से कतराता था। आसपास के लोग चर्चा कर रहे थे कि इनामुल का परिवार दरगाह आला हजरत का मुरीद है पर इनामुल को देखकर उन्हें लगता था कि वह देवबंदी हो गया है। हालांकि उसने कभी इस मामले में खुलकर कुछ नहीं बताया।
जेहादी की शानदार है अंग्रेजी, देश दुनिया का है इल्म
एटीएस सूत्रों की मानें तो इनामुल भले ही इंटर फेल है पर वह देश दुनिया की अपडेट जानकारी रखता है। वह अंग्रेजी भी अच्छी तरह बोल और समझ लेता है। उर्दू का भी अच्छा जानकार है। टीम मान रही है कि जेहादी मानसिकता वाले इनामुल ने अधिकांश ज्ञान इंटरनेट से पाया है। टीम पता लगा रही है कि उसके कनेक्शन किसी जेहादी या अलगाववादी नेता से तो नहीं हैं।
बरेली में स्लीपर सेल सक्रिय, बड़े मामलों में जुड़ता रहा है कनेक्शन
हाल ही में कमलेश तिवारी हत्याकांड में बरेली के लोगों का मददगार के तौर पर नाम सामने आया। नेपाल के जरिये हो रही टेरर फंडिंग में भी बरेली के लोग निकले। पहले अक्षरधाम मंदिर हमले के मामले में बरेली के लोगों का नाम आ चुका है, यह अलग बात है कि जांच में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। मेरठ में पकड़े गए आईएसआई के जासूस एजाज ने भी कई साल बरेली में किराये पर रहकर सैन्य क्षेत्र की गतिविधियां देखी थीं। दिल्ली और लखनऊ के बीच का शहर बरेली उत्तराखंड और नेपाल से सटा है, इसलिए भी आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए यह सुरक्षित पनाहगाह है।
इनामुल की गिरफ्तारी एटीएस लखनऊ ने की है। बरेली पुलिस का इस प्रकरण से मतलब नहीं है। एटीएस ही विवेचना में सच्चाई का पता लगाकर कार्रवाई करेगी। - राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी