सबसे पहले इन दो तस्वीरों को जरा गौर से देखिए, एक तस्वीर है विश्वविद्यालय की और दूसरी बरेली के मैदान की.. अगर आप हॉकी के खिलाड़ी हैं तो शायद चौंक जाएंगे। यहां उत्तर भारत के 21 विश्वविद्यालयों की महिला वर्ग हॉकी की नॉर्थ जोन प्रतियोगिता के मैच होने जा रहे हैं और मैदान का यह हाल है। प्रतियोगिता 18 से 21 दिसंबर तक होनी है। ऊबड़-खाबड़ मैदान पर कई जगह बड़े गड्ढे हैं तो कहीं पर जरा भी घास नहीं है। इनके गड्ढों को एक-दो दिन पहले ही पाटा गया है। बरेली कॉलेज के मैदान पर तो अब भी गड्ढे पाटे जा रहे हैं। बॉल अगर इन गड्ढ़ों से होकर निकले तो इनमें ही धंसी रह जाएगी। एस्ट्रोटर्फ न सही पर इस स्तर की प्रतियोगिता के लिए कम से कम एक बेहतर मैदान तो तैयार किया जाना चाहिए था। यहां चार दिन बाद मुकाबले शुरू होने हैं और मैदान बदहाल है। विश्वविद्यालय का मैदान को फिर भी थोड़ा बेहतर कह सकते हैं पर बरेली कॉलेज के मैदान का हाल तो बेहद बदतर है। मैदान पर जगह-जगह गड्ढे हैं। इन्हें अब सही कराया जा रहा है। यहां बुधवार को भी काम चल रहा था। हालांकि दावे हॉकी खिलाड़ियों को बेहतर मैदान और सुविधाएं देने के किए जा रहे हैं पर इंतजाम देखकर लग रहा कि यहां इंटर कॉलेज लेवल की प्रतियोगिता कराई जा रही हों।
विश्वविद्यालय की साख भी दांव पर
इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की साख भी दांव पर होगी। विश्वविद्यालय के पास पंजाब और डीयू जैसी टीम नहीं है। मौजूदा टीम में पांच खिलाड़ी तो पिछले साल की ही हैं जो फिटनेस में फेल हो गईं थीं और टीम नार्थ जोन नहीं खेल पाई थी। इस बार विश्वविद्यालय मेजबानी कर रहा है तो मजबूरन टीम तैयार कराई गई। टीम के साथ विश्वविद्यालय का मैदान भी दक्षिण भारत के 20 विश्वविद्यालयों और भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के प्रतिनिधियों के सामने किरकिरी करा सकता है। क्योंकि एआईयू ने ही कहा था कि नॉर्थ जोन हॉकी एस्ट्रोटर्फ पर ही होनी चाहिए।
विशेषज्ञों की राय, ऐसा होना चाहिए मैदान
हॉकी की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकीं और रेलवे कोच गीता शर्मा के अनुसार हॉकी वैसे तो एस्ट्रोटर्फ पर ही होनी चाहिए। अगर एस्ट्रोटर्फ नहीं तो समतल मैदान हो। जिसमें या तो एक समान घास हो या फिर बिल्कुल घास न हो। गड्ढे या ऊबड़ खाबड़ मैदान में तो खिलाड़ी घायल हो जाएंगे। प्रतियोगिता कराने के लिए तो काफी पहले से तैयारी होनी चाहिए थी। अगर कुछ भाग में घास और कुछ मैदान खाली है तब भी खिलाड़ियों को दिक्कत होगी। बीच में क्रिकेट की पिच तो होनी ही नहीं चाहिए थी। समतल घास हो और उस पर पानी छिड़क कर स्मूथ किया जाए तब वो मैदान हॉकी खेलने लायक हो पाएगा।
इन यूनिवर्सिटी के मैच होंगे विवि कैंपस में
आरएमडी यूनिवर्सिटी रोहतक, डॉ. आरएमएल अवध यूनिवर्सिटी फैजाबाद, दिल्ली यूनिवर्सिटी, एचपी यूनिवर्सिटी शिमला, इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर रेवाड़ी, सीएसजे महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर, यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू, सीएच बंसी लाल यूनिवर्सिटी भिवानी, यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर, एमजेपी आरयू बरेली और जीएनडीयू अमृतसर।
इनके मैच होंगे बरेली कॉलेज में
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी, श्री गुरू ग्रंथ साहिब यूनिवर्सिटी, सीएच देवी लाल यूनिवर्सिटी सिरसा, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल, लवली यूनिवर्सिटी फगवाड़ा, डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा, पंजाब यूनिवर्सिटी पटिलाया।
वर्जन
विश्वविद्यालय कैंपस और बरेली कॉलेज में मुकाबले होंगे। मैदान ठीक कराया जा रहा है। मैदान समतल कराकर घास काटी गई है। एस्ट्रोटर्फ के लिए भी प्रयास कर रहे हैं कि कुछ मैच साई सेंटर पर कराएं। मैदान पर जोे कमियां दिख रहीं हैं उनको ठीक कर रहे हैं।
- प्रोफेसर एके जेटली, क्रीड़ा सचिव रुविवि