बरेली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का एलान होते ही मुस्लिम बुद्धिजीवियों और उलमा के बीच भी बहस शुरू हो गई। अमर उजाला ने इन लोगों से बात की तो साफ तौर पर एक-दूसरे मुखालिफ दो जुदा राय सामने आईं। एक ने केंद्र सरकार के इस फैसले को कश्मीर के पक्ष में साहसिक और अभूतपूर्व फैसला बताया तो दूसरा पक्ष इस फैसले से पहले कश्मीरियों को भरोसे में न लेने पर नाखुश दिखा।
कश्मीरियों को भरोसे में लिया होता तो कुछ और बात होती
कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला वहां की अवाम को भरोसे में लेकर किया जाना चाहिए था। अब चूंकि निर्णय ले ही लिया गया है तो हुकूमत से यही उम्मीद करते हैं कि वहां की अवाम को राहत देकर अम्नोअमान का रास्ता बनाया जाएगा। कश्मीर के हालात में सुधार होने के साथ कारोबार बहाल होंगे। - मौलाना तसलीम रजा खां, नबीरे आला हजरत
प्रधानमंत्री के भाषण से काफी उम्मीद बंधी थी कि अब अल्पसंख्यों का भला होगा मगर ऐसा हुआ नहीं। अब तो धीरे-धीरे अल्पसंख्यकों के हकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हुकूमत का पहला काम संविधान पर अमल करते हुए हर मजहब और फिरके के हकों का ख्याल रखना है। अनुच्छेद 370 हटाने की अभी कोई जल्दी नहीं थी। एक के बाद एक सरकार के फैसले अल्पसंख्यकों में बेचैनी पैदा कर रहे हैं। - शब्बू मियां नियाजी, प्रबंधक खानकाह नियाजिया
कश्मीर भी अब अपना, स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा ये फैसला
जरूरी नहीं कि हम किसी पार्टी के विरोधी हैं तो उसके हर फैसले का भी विरोध करें। मेरे विचार में अनुच्छेद 370 समाप्त होना हम सब भारतीयों के लिए संतुष्टि की बात होना चाहिए क्योंकि अनुच्छेद 370 खत्म होने से अब जम्मू कश्मीर में भी भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा सकेगा। भारत का अंग होते हुए कश्मीर में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान होता रहा है। अब ऐसा करना अपराध माना जाएगा, यह संतोष की बात है। - कलीम हैदर सैफी, अधिवक्ता
केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर एक ऐतिहासिक काम किया है जिसे हिंदुस्तान के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। कश्मीरी मुसलमानों के भारतीय मुख्य धारा में जुड़ने से देश के अंदर सौहार्द पैदा होगा जो कुछ समय बाद दिखाई देगा। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी भारत का अभिन्न अंग है, अब उम्मीद है कि उसके भारत में होने का एहसास होगा। - चौधरी अनवार एवज, संस्थापक मुस्लिम राष्ट्रवादी सेवक संघ