खाते और डाटा उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर नहीं होती कार्रवाई
कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों को स्थानीय ठग ही खाते और शिकार का डाटा उपलब्ध कराते हैं। जिनके खाते में बड़ी रकम होती है उनका डाटा जब कंबोडिया में बैठे ठगों तक पहुंचता है तो वह ठगी करने में लग जाते हैं। शिकार फंसने पर वह भारतीय खातों में ही रुपये ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बाद रकम क्रिप्टो करेंसी में बदल दी जाती है। यदि कंबोडिया में बैठे ठगों को डाटा और खाते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो तो ठगी के मामले कम हो सकते हैं।
किसी के बहकावे में न आएं
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि साइबर ठगों की गिरफ्तारी में टीम लगी रहती हैं। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में दिक्कत आती है तो उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप से सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी मदद ली जाती है। हालांकि विदेश में धन जाने के बाद उसकी बरामदगी मुश्किल होती है। फिर भी लोगों को चाहिए कि लुभावने विज्ञापनों व किसी तरह के बहकावे व झांसे में न आएं। ठगी होते ही सबसे पहले साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतना ही धन वापसी की उम्मीद रहेगी।