बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले मसीउद्दीन की सत्ता से जुड़े लोगों पर मजबूत पकड़ है, इसलिए वह सब उसे बचाने में लग गए हैं।
सपा नेता इकबाल खान की शिकायत के करीब ढाई महीने बाद चौदह फरवरी को डीआईजी के आदेश पर इस प्रकरण मुकदमा दर्ज हुआ लेकि न कोतवाली पुलिस की विवेचना अभी एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है। पीलीभीत के मीरपुर वाहनपुर गांव के इकबाल ने खुद अपना शस्त्र लाइसेंस अपनी ससुराल थाना भुता के डंडिया नवाजिश अली गांव के पते पर बनाया था। इकबाल फंसा तो उसने तेरह और लोगों की पोल खोल दी। पीलीभीत के दीदार बख्श, महादेवा, अभयपुर चेना नकटी गांव के जिन लोगों के खिलाफ फर्जी पतों पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का आरोप है, वह खुलेआम घूम रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पीलीभीत में ही अभी 50 लोगों के पास ऐसे शस्त्र लाइसेंस हैं, जो बरेली के फर्जी पतों पर जारी हैं। मीरपुर वाहनपुर गांव के अखलाक और महादेवा गांव के आरिफ हुसैन का शस्त्र लाइसेंस भी फर्जी पते पर बना है। फर्जी पते पर लाइसेंस बनवाने वाले सिद्दीक ने शाहजहांपुर के निगोही थाना के लौहरगवां गांव में रहने वाले अपने रिश्तेदार का भी बरेली के पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवा दिया था। एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा का कहना है कि विवेचना में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होगी। मंगलवार को वह विवेचक को बुलाकर खुद इस मामले को देखेंगे।
कमिश्नर ने डीएम से मांगी रिपोर्ट
बरेली। मंडलायुक्त प्रमांशु यादव ने बरेली के फर्जी पतों पर पीलीभीत के लोगों के शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम से रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि अब तक ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त हो जाने चाहिए थे। प्रशासन को बिना रिपोर्ट आए स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस से खुद जानकारी करनी चाहिए। इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी। विवेचना के दौरान जिन लोगों का अपराध बनेगा उनमें से कोई नहीं बचेगा। आवेदन पर रिपोर्ट लगाने में लेखपाल, हल्का दरोगा की अहम भूमिका रही है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।