बरेली। पंचायतों को बजट मिला तो मनमानी भी शुरू हो गई। हाल यह है कि बिल-वाउचर की जगह फाइल की नोटशीट पर भुगतान किया जा रहा है। यही नहीं, यह नोटशीट बकायदा ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भी अपलोड की जा रही हैं। पूरे मामले की जानकारी होने के बाद डीडीओ ने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर विकास कार्यों से जुड़े विवरण में काफी खामियां देखने को मिल रहीं हैं। पांचवें और 15वें वित्त आयोग की धनराशि के खर्चे संदेह के घेरे में हैं। बिलों पर लेखाकार के हस्ताक्षर जरूर मिल रहे हैं, लेकिन ब्लॉक प्रमुख, बीडीओ और जेई के न तो हस्ताक्षर हैं और न ही मुहर लगी है। कई काम ऐसे भी दिखाए गए हैं, जिनमें सादा वाउचर है और हस्ताक्षर भी प्रमाणित नहीं हैं लेकिन भुगतान किया गया है। लाखों रुपये के भुगतान व्यक्तिगत लोगों को कर पोर्टल पर बिल-वाउचर की जगह लेखाकार के हस्ताक्षर से फाइल की नोटशीट ही अपलोड कर दी गई है।
बहेड़ी ब्लॉक में वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त आयोग में एक काम को अलग-अलग दिखाकर 50 लाख से ऊपर का भुगतान हुआ, वह भी एक व्यक्ति के नाम पर। यही नहीं, इस भुगतान के बिल-वाउचर की जगह नोटशीट ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड कर दी गई, जिस पर केवल लेखाकार के ही हस्ताक्षर हैं और ब्लॉक प्रमुख एवं बीडीओ के न तो हस्ताक्षर हैं और न ही मुहर लगी है। संवाद
केस-1
भुता में बिल एक भुगतान अनेक
भुता ब्लॉक के गांव नगीरामपुर में मुन्ने के घर से अजमत के प्लॉट तक इंटरलॉकिंग कार्य पर 30 अगस्त 2024 के बिल-बाउचर से 1,12,200 रुपये का भुगतान हुआ। इसमें गुप्ता ऑर्डर एंड सप्लायर बिसालपुर रोड से 80 एमएम इंटरलॉकिंग टाइल्स की खरीद का अंकन है। ये 2,11,596 रुपये का बिल (टैक्स इनवॉइस नंबर-87) 14 मार्च 2024 की तारीख में काटा गया था। फिर इंटरलॉकिंग कार्य दिखाकर 30 अगस्त 2024 को ही 76,859 रुपये का भुगतान गुप्ता ऑर्डर एंड सप्लायर को हुआ। सवाल उठता है कि एक ही तारीख में, एक ही बिल पर दो भुगतान कैसे किए गए।
केस-2
भोजीपुरा में भी कई मामले
भोजीपुरा ब्लॉक में ग्राम जाफरपुर में 5वें वित्त आयोग में रामलाल के घर से रामपाल के घर तक सीसी रोड व नाली निर्माण (वर्क आइडी-108531752) पर 7,03,973 रुपये खर्च दिखाया है। ये भुगतान लक्ष्मी इंटरप्राइजेज को हुआ है। भुगतान के बाद ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर बिल-बाउचर की जगह नोटशीट ही ऑनलाइन कर दी। इसमें एक मार्च 2025 की तारीख में लेखाकार के हस्ताक्षर हैं, जबकि जेई और बीडीओ के कॉलम में न तो हस्ताक्षर हैं और न ही मुहर लगी है। ऐसे ही भोजीपुरा ब्लाॅक में कई मामले हैं, जिनके बिल संदेह उत्पन्न कर रहे हैं।
एक लाख रुपये से अधिक के काम बिना टेंडर के नहीं हो सकते। एक कार्य के अलग-अलग एस्टीमेट भी नहीं बनाए जा सकते। पांचवें या 15वें वित्त आयोग में जो कार्य अनुमन्य हैं, वहीं हो सकते हैं। 5वें व 15वें वित्त आयोग में धनराशि के खर्चे के मामले में क्षेत्र पंचायतों से वार्षिक उपभोग प्रमाण पत्र लेते हैं, जिसे शासन में भेजते हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर हर खर्चे के बिल-वाउचर अपलोड होते हैं, यदि कोई नोटशीट अपलोड कर रहा है तो गलत है। जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - दिनेश कुमार यादव, डीडीओ