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Bareilly News: छह महीने पहले मंजूरी, निर्माण अब तक शुरू नहीं

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बरेली। बरेली-बदायूं हाईवे का चौड़ीकरण तीन महीने से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनापत्ति (एनओसी) की वजह से फंसा है। पत्रावली रीजनल एंपावर्ड कमेटी लखनऊ तक पहुंच गई है। मार्च में ही कमेटी की बैठक होनी है। यहां से हरी झंडी मिलने के बाद दिल्ली स्थित वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति मिल सकेगी। इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए स्वीकृति छह महीने पहले मिली थी पर अड़चनों की वजह से काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
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बरेली से मथुरा तक 216 किलोमीटर लंबे हाईवे का निर्माण होना है। पहले चरण में मथुरा से हाथरस और दूसरे चरण में हाथरस से कासगंज तक काम चल रहा है। तीसरे चरण में कासगंज से बदायूं तक काम प्रक्रिया में है। चौथे चरण में बदायूं से बरेली तक तक 38.5 किलोमीटर हाईवे को डेढ़ मीटर चौड़े डिवाइडर के साथ फोर लेन किया जाना प्रस्तावित है।
इसकी मंजूरी 12 सितंबर 2024 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने दी थी। उम्मीद की जा रही थी कि अगले छह महीने में काम शुरू हो जाएगा लेकिन न तो भू-अधिग्रहण पूरा हुआ और न ही वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनापत्ति मिल सकी। इस बीच इसके लिए प्रक्रिया जरूर शुरू हुई।
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एनएचएआई और वन विभाग की टीम ने हाईवे के चौड़ीकरण में बाधा बन रहे 12 हजार पेड़ चिह्नित किए। इनकी गणना के बाद बदायूं जिले में रिजर्व फाॅरेस्ट की जमीन पौधे लगाने के लिए चिह्नित की जा चुकी है। इसका उल्लेख करते हुए अब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी के लिए आवेदन किया गया है। एनओसी अभी प्रक्रिया में है। एनओसी जारी होने और अधिगृहीत की जाने वाली कुल भूमि की 80 फीसदी जमीन पर कब्जा मिलने के बाद ही निर्माण के लिए निजी फर्म का चयन होगा। फिलहाल टेंडर प्रक्रिया भी फंसी हुई है।
वर्जन
पेड़ काटने से पहले वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी अनिवार्य है। इसके लिए प्रक्रिया है। आवेदन की औपचारिकता पूरी की गई है। लखनऊ में पर्यावरण मंत्रालय की रीजनल एंपावर्ड कमेटी की बैठक होनी है। बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो फिर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय तक प्रस्ताव जाएगा। इसके बाद एनओसी मिल सकेगी। - उत्कर्ष शुक्ला, परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
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परियोजना पर एक नजर :
1527 करोड़ रुपये कुल लागत
837 करोड़ निर्माण पर होंगे खर्च
270 करोड़ रुपये भू-अधिग्रहण पर होंगे खर्च
(परियोजना में मलगांव में तीन किलोमीटर और बिनावर में ढाई किलोमीटर, हिम्मतपुर में 1.85 किलोमीटर और देवचरा में 5.70 किलोमीटर लंबा बाइपास प्रस्तावित)
ब्यूरो
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