सिरौली/गुलड़िया (बरेली)। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की सहारनपुर और बरेली यूनिट की संयुक्त टीम ने सिरौली थाना क्षेत्र के गांव गुरगवां में करोड़ों रुपये की अफीम की फसल को नष्ट कराया है। लंबरदार ने ही अवैध रूप से फसल कराई थी। मामले में दो आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं।
टीम को सूचना मिली थी कि इस गांव में अवैध रूप अफीम की फसल उगाई जा रही है। फसल करने वालों ने इसका प्रसंस्करण भी शुरू कर दिया है। शुक्रवार दोपहर टीम ने छापा मारा और फसल को नष्ट करा दिया। आरोपी हत्थे नहीं चढ़ सके हैं। मौके से न केवल तैयार फसल, बल्कि अफीम के प्रसंस्करण में इस्तेमाल किए जाने वाले कई उत्पाद और उपकरण भी बरामद किए गए। साक्ष्य के रूप में नमूने एकत्र कर फसल को नष्ट करा दिया गया। पुलिस के मुताबिक छापेमारी की भनक लगते ही आरोपी लंबरदर छत्रपाल और उसका साथी राजेश्वर गांव से भाग गए।
मृत महिला के नाम जारी लाइसेंस पर उगाई गई फसल
गांव गुरगवां निवासी कृष्णा देवी के नाम अफीम की खेती का लाइसेंस था, लेकिन उनकी मौत हो चुकी है। लंबरदार छत्रपाल और उसके साथी राजेश्वर उर्फ राजू ने कृष्णा देवी के नाम की फसल को चोरी-छिपे अपने खेत में कर लिया। फसल से अफीम निकालनी भी शुरू कर दी। इसकी शिकायत किसी ने एएनटीएफ से कर दी। इसके बाद बृहस्पतिवार को टीम ने छापा मारा। राजेश्वर के खेत में अफीम की फसल मिली। थाना प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नारकोटिक्स विभाग की भूमिका पर भी सवाल
इस प्रकरण में नारकोटिक्स विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। नारकोटिक्स विभाग की टीम बोआई के दो माह बाद मौके पर जाकर एक-एक खेत की पैमाइश करती है। अगर मृतक महिला के नाम जारी लाइसेंस पर अफीम की फसल की गई तो पैमाइश के दौरान यह नारकोटिक्स विभाग की पकड़ में क्यों नहीं आई? इसका उत्तर अधिकारियों के पास भी नहीं है।