फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: गोला और उसके साथियों पर धोखाधड़ी की एक और रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। आरके गोला और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमों की फेहरिस्त लंबी हो रही है। एसएसपी के आदेश पर इनके खिलाफ ठगी का 10वां मामला दर्ज हुआ है। दोनों भाइयों व कंपनी के पदाधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है।
विज्ञापन

सुभाषनगर थाना क्षेत्र की गणेशनगर कॉलोनी के तेजस्व पाल ने रिपोर्ट कराई है कि वह अकाउंटेंट की नौकरी करते हैं। उनकी पत्नी मंजू गारमेंट की दुकान चलाती हैं। दोनों की कुल आय 28,000 रुपये महीना है। उन्होंने अपनी आय से जमा काफी पूंजी रूप किशोर गोला की आईसीएल कंपनी में लगाई थी। छह लाख से ज्यादा रुपये उन्हें मिलने थे। उन्होंने गोला व उसके भाई एके गोला से रुपये देने को कहा तो केवल कुछ रुपया ही लौटाया। उनके 5.45 लाख रुपये इन लोगों ने हड़प लिए।
मारपीट कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। तेजस्व पाल ने कंपनी के एमडी रूप किशोर गोला, अवधेश कुमार गोला, जितेंद्र कुमार गुप्ता व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट कराई है।
विज्ञापन

कानपुर गई टीम, चिट फंड ऑफिस में देखे दस्तावेज
गोला ने आईसीएल के साथ ही कई मुखौटा कंपनियां खड़ी कर रखी थीं। इस सिलसिले में छानबीन करने के लिए प्रेमनगर थाना प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने एक टीम कानपुर भेजी है। वहां चिट फंड ऑफिस में इनकी कंपनी व मुखौटा कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
गोला के साथी की जमानत अर्जी खारिज
गोला के साथ उसकी कंपनी के अधिकारी जितेंद्र गुप्ता भी जेल भेजा गया था। उसने पहले खुद पर एक ही मुकदमा दिखाकर जमानत अर्जी स्थानीय कोर्ट में डाली थी। पुलिस ने उसे गोला का मुख्य साथी बताकर उसके खिलाफ दर्ज छह मुकदमों की जानकारी कोर्ट को देकर जमानत अर्जी का विरोध किया। पहले स्थानीय कोर्ट से जितेंद्र की जमानत खारिज हुई और शुक्रवार को जिला जज की अदालत ने भी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
फोटो- गौरव राठौर
निवेशकों को ऐसे मिल सकेगी रकम

निवेशक चाहते हैं कि उनकी डूबी रकम मिल जाए। फौजदारी व सोसायटी मामलों के जानकार अधिवक्ता गौरव राठौर ने बताया कि प्रकरण के संबंध में जो भी मुकदमे होंगे, उनका संयुक्त विचरण होगा। पीड़ितों को एकजुट होकर संयुक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए ताकि विधि विरुद्ध कार्य सिद्ध हो सके। आरोपियों की संपत्ति का विवरण भी पुलिस व कोर्ट को दे सकते हैं। निवेशक सिविल कोर्ट में मनी रिकवरी सूट के जरिये अपनी रकम का दावा कर सकते हैं। यदि आरोपी रकम नहीं लौटाएंगे तो उनकी संपत्ति की नीलामी से वसूली की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें