बरेली। स्वाइन फ्लू का भले ही इधर कोई नया मामला सामने न आया हो, लेकिन 29 जनवरी को स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मिली महिला के स्वास्थ्य में कोई सुधार न होने पर उसने दम तोड़ दिया। वह 21 जनवरी से बीमार थी और एक महीने तक मौत से लड़ने के बाद दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी हार गई।
23 वर्षीय कविता (परिवर्तित नाम) फरीदपुर की रहने वाली थी। एक माह पहले 21 जनवरी को उसे बुखार और सीने में दर्द हुआ तो जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां छह दिन इलाज चला लेकिन स्वाइन फ्लू के लक्षण डॉक्टरों को नहीं दिखे। 29 जनवरी को कविता के परिजन उसे एसआरएमएस मेडिकल कालेज ले आए। यहां डॉक्टराें ने भर्ती करते ही स्वाइन फ्लू की आशंका जता दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सूचना पर कविता के नमूने लिए और पीजीआई लखनऊ भेजा। 31 जनवरी को उसके नमूनों में एच1 एन1 वायरस की पुष्टि हुई। हालांकि कविता को मेडिकल कालेज में वेंटीलेटर पर रखा गया था लेकिन फायदा न होने पर परिवार के लोग उसे दीपमाला अस्पताल ले आए। यहां 20 फरवरी तक कविता वेंटीलेटर पर रही लेकिन हालत नहीं सुधरी। 20 की सुबह को ही परिवार वाले उसे दिल्ली दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले गए थे। जहां रविवार सुबह उसकी मौत हो गई।
- अब तक हो गई छह मौतें
20 फरवरी- 23 वर्षीय महिला, फरीदपुर
12 फरवरी- 32 वर्षीय महिला, रामुपर मिलख
07 फरवरी- 23 वर्षीय महिला, लखीमपुर
04 फरवरी- 16 वर्षीय किशोरी, बीडीए कालोनी
07 जनवरी- 62 वर्षीय बुजुर्ग, नरकुलागंज
20 जनवरी- 15 वर्षीय किशोरी, मीरगंज
काउंसिलिंग के चार दिन पहले ही चल बसी कविता
परिवार कोर्ट में चल रहा था मामला
बरेली। 23 साल की कविता की जिंदगी इतनी सूनी होगी किसी को नहीं पता था। पिछले साल 12 जून को उसकी शादी फरीदपुर बकसरिया के प्रदीप गुप्ता से हुई थी। मनमुटाव और दहेज की खातिर कविता को पति मायके छोड़ आया। तब से वह बीमार रहने लगी। स्वाइन फ्लू हो गया और चल बसी। अंतिम संस्कार तक बड़े भाई को करना पड़ा। मामला परिवार कोर्ट में चल रहा था। 25 फरवरी को आखिरी काउंसिलिंग होनी थी।
सीबीगंज की कविता (परिवर्तित नाम) के पिता ओसी लाल गुप्ता आठ साल पहले गुजर गए थे। मां शांति गुप्ता और दो बड़े भाई राकेश और हरीश गुप्ता ने जैसे तैसे उसका घर बसाया। लेकिन शादी के बाद छोटी-छोटी बातों पर ससुराल में झगड़ा होने लगा। कविता के पड़ोसियाें ने बताया कि 23 अक्तूबर को उसका पति मायके छोड़ गया। नवंबर में भाई कविता को ससुराल छोड़ने गए तो घर में घुसने नहीं दिया गया। फरीदपुर थाने में रिपोर्ट लिखाने गए तो लिखी नहीं गई। पंचायत में दो बार मामला पहुंचा लेकिन कोई हल नहीं निकला। कविता जब फोन मिलाती तो न पति और न ही ससुराल पक्ष से कोई बात होती। 21 जनवरी को जब तबियत ज्यादा बिगड़ी तो उसे 108 से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल से एसआरएमएस और फिर दीपमाला से दिल्ली तक कविता के मायके ने तीन लाख से अधिक खर्च कर दिए। वेंटीलेटर में एक माह तक रखने का खर्च परिवार वाले किसी तरह उठाते रहे। लेकिन इस बीच न पति मिलने आया और न ही कोई और।