फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धूमधाम से मनाया गया अन्नकूट और गोवर्धन महोत्सव

विज्ञापन
घरों में गोवर्धन महाराज की पूजा अर्चना करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन

इस बार भंडारे की जगह बांटे गए खाने के पैकेट

बरेली। दीवाली के दूसरे दिन रविवार को अन्नकूट और गोवर्धन महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर और अन्य जगहों पर गोवर्धन और अन्नकूट पूजा की गई। हरि मंदिर में महिलाओं ने भजन गाए तो कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार कई जगह भंडारे की जगह खाने के पैकेट बांटे गए।
विज्ञापन

बाबा त्रिबटीनाथ मंदर में अन्नकूट महोत्सव सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाया गया। महाआरती में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, आदेश प्रताप सिंह, मंदिर कमेटी के प्रताप चंद सेठ, हरिकृष्ण अग्रवाल, विनय कृष्ण, सुभाष मेहरा आदि शामिल हुए। संजीव अवतार अग्रवाल ने बताया कि भोग व्यवस्था में कोई खाद्य सामग्री वितरित नहीं की गई। केवल भगवान को भोग लगाया गया। बमनपुरी स्थित नरसिंह मंदिर में विधि विधान से गोवर्धन पूजा गई। इसके बाद नरसिंह भगवान को अन्नकूट प्रसाद का भोग लगाया गया। मंदिर परिसर में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए भंडारे का आयोजन नहीं किया गया। कार्यक्रम में आए लोगों को खाने के पैकेट दिए गए। इस अवसर घासीराम अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, त्रिलोक चंद, अमित अरोड़ा, अंशिका, अंकुर, दिलीप अग्रवाल आदि उपस्थित थे। हरि मंदिर समिति महिला संकीर्तन मंडल ने भजन संध्या की। जिसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दीपक साहनी, रवि छाबड़ा, अनिल चड्डा, सतीश खट्टर आदि उपस्थित थे।

द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने उंगली पर उठाया था गोवर्धन पर्वत

बरेली। द्वापर युग में ग्वाल वासियों को भीषण वर्षा से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक उंगली से उठाकर इंद्र का मान मर्दन किया था। वर्षा रुकने के बाद जिसके पास जो अन्न था, उसे कूटकर प्रसाद तैयार किया था। इसके बाद इंद्र ने अपनी हार स्वीकार की। तब ही से इंद्र की पूजा की जगह भगवान विष्णु स्वरूप श्री कृष्ण की पूजा होने लगी।

चर लग्न में विधि विधान के साथ हुई दीवाली की पूजा

बरेली। शनिवार को लोगों ने विधि विधान के साथ गणेश लक्ष्मी की पूजा करके दीवाली मनाई। लोगों ने गणेश और लक्ष्मी जी को नए वस्त्र पहनाकर उनका टीका करके भोग लगाया। इसके बाद मिठाई खिलाकर एक दूसरे को दीवाली की बधाई दी। उन्होंने अपना घर झालर, दिये और मोमबत्ती से घर सजाया। देर रात तक पटाखे भी छोड़ गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें