बरेली। पति-पत्नी एक गाड़ी के दो पहिये हैं। एक पर ज्यादा जिम्मेदारी से संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए दोनों को बराबर जिम्मेदारियां उठानी चाहिए। यह कहना है फरीदपुर के ग्राम बिलपुर की अनीता वर्मा का। बच्चों की पढ़ाई और बाकी जरूरतों के बाद जब पति दिनेश वर्मा पर दबाव बढ़ने लगा तो उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। स्वाद की पूंजी लेकर स्ट्रीट फूड का कारोबार शुरू किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साझे प्रयास से आज वह बच्चों की बेहतर परवरिश कर रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
अनीता ने समूह से मिली आर्थिक सहायता से अपना काम शुरू किया। आज शादी-ब्याह के लिए भी ऑर्डर बुक करती हैं। उनके इस काम से कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। ऑर्डर ज्यादा होने पर साथी महिलाओं को भी लाभ में हिस्सा देती हैं। इस काम के बूते उन्हें क्षेत्र में पहचान भी मिली है।
अनीता बताती हैं कि दो साल पहले उन्होंने यह काम करने का फैसला किया। उस वक्त पति दिनेश नौकरी करते थे। बच्चों की पढ़ाई और बाकी जरूरतों की वजह से खर्च बढ़ने लगा तो उनको असुविधा होने लगी। परेशानियों की वजह से खर्च कम नहीं किया जा सकता था, इसलिए आय के साधन बढ़ाना ही एक मात्र रास्ता था। कुछ समय बाद समूह के संपर्क में आने से उन्हें कई रास्तों के बारे में पता चला। यहीं से अपना काम करने का फैसला किया और समूह के जरिये इसका प्रशिक्षण और अन्य मदद मिली। परिस्थितियां बेहतर हुईं तो पति ने भी हाथ बंटाना शुरू कर दिया। उनकी वजह से अन्य महिलाओं को भी मौका मिला।