जननायक एक्सप्रेस के जनरल कोच में नेपाल की लड़की को अकेले देखकर शाहजहांपुर के दो यात्रियों ने जीआरपी पुलिस को सौंप दिया। चौदह वर्षीय किशोरी टूटी-फूटी हिंदी बोल रही थी। उसने बताया कि घर का काम न करने पर मां ने डांट दिया था। इसी से नाराज होकर वह घर से भाग निकली। उसे चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया। किशोरी को स्वधार आश्रय गृह में रखा गया है।
शाहजहांपुर के अर्जुन सिंह और एमए खान को जननायक एक्सप्रेस के जनरल कोच में नेपाल की बच्ची अकेली दिखी। पूछने पर उसने मां की डांट के बाद भागने की कहानी सुना दी। बच्ची के साथ कोई अनहोनी न हो, इसलिए दोनों यात्रियों ने बरेली पहुंचने के बाद किशोरी को पुलिस के हवाले कर दिया। किशोरी नेपाल से मुजफ्फरनगर पहुंची, जहां से ट्रेन में बैठकर बरेली आ गई थी। वह कहां जाना चाहती थी, इसके बारे में कुछ नहीं बता पाई। बाल कल्याण समिति किशोर न्याय (देख रेख एवं सरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत जीआरपी ने बच्ची को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। अब स्वधार आश्रय गृह में रखा गया है। अब जीआरपी नेपाल पुलिस की मदद से किशोरी के परिवार को तलाश रही है।
नेपाली भाषा से पुलिस को हुई दिक्कत
इंस्पेक्टर विजय कुमार ने बताया कि विनीता (14) पिता का नाम किशोरी राम बताया। वह नेपाल के मधुबन थाना के शिमरा भगवतीपुर की है। भाषा संबंधी दिक्कत की वजह से ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई।