बरेली। घायल और प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के लिए शुरू की गई निशुल्क एंबुलेंस सेवा में गोलमाल किया जा रहा है। शासन से नियत की गई एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी गर्भवती महिलाओं को 250 रुपये के बजाए 500 रुपये में अस्पताल पहुंचा रही है। 102 एंबुलेंस सेवा की बजाए घायलों को पहुंचाने के लिए नियत 108 सेवा की एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को ढोया जा रहा है। 102 सेवा की एंबुलेंस को प्रति चक्कर जहां 250 रुपये मिलते हैं वहीं 108 सेवा को 500 रुपये। दोनों सेवाओं की सेवा प्रदाता कंपनी जिविको है।
मंडल भर में 108 सेवा की 62 एंबुलेंस में से 51 सक्रिय हैं उन्होंने एक महीने में सड़क दुर्घटना के 523 घायलों को ही अस्पताल पहुंचाया। यहां यह तथ्य छिपा हुआ है कि दुर्घटना के ज्यादातर मामले यहां की प्राइवेट एम्बुलेंस ले लेती हैं और उन्हें जिला अस्पताल की जगह निजी अस्पतालों तक पहुंचा दिया जाता है।
मंडल में 108 सेवा की कार्यरत 51 एंबुलेंस ने 4731 प्रसूता को अस्पताल पहुंचाया। अगर यह सभी प्रसूता 102 सेवा की एंबुलेंस से लाईं जातीं तो कंपनी को 11 लाख 82 हजार 750 रुपये देने पड़ते लेकिन इन गर्भवती महिलाओं को 108 सेवा की एंबुलेंस से लाने के कारण शासन को 23 लाख 65 हजार 500 रुपये देने पड़ेंगे यानी दो गुना। 108 एंबुलेंस ने 64 फीसदी से अधिक मामलों में गर्भवती महिलाओं के लिए अपनी सेवाएं दी हैं जबकि घायलों के लिए महज सात फीसदी। इस मामले की शिकायत के बाद कमिश्नर ने सीडीओ एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी के कार्यों पर नजर रखने और सेवा प्रदाता कंपनी के साथ बैठक करने के लिए कहा है।
इन खामियाें पर भी कंपनी चुप
खराब 24 एंबुलेंस को अभी तक नहीं किया ठीक
समय पर नहीं हो रही मेंटीनेंस
वीटीएस सिस्टम और उपकरण हैं खराब
ये हैं आंकड़े
एंबुलेंस संख्या कार्य कर रहीं प्रसव मामले नवजात मामले सड़क दुर्घटना
102 125 112 12275 427 0
108 62 51 4731 8 523
नोट- यह एक माह के मंडलीय आंकड़े हैं।
एंबुलेंस को लेकर कई शिकायतें हैं। ठेकेदार कंपनी मेंटीनेंस तक नहीं करा रही हैं। 108 सेवा से प्रसूता ढोने के मामले में जानकारी की जा रही है। कमिश्नर के आदेश पर अब हर हफ्ते एंबुलेंस से संबंधित लोगाें की मीटिंग ली जाएगी।
डॉ. सुबोध शर्मा, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य
मैंने कंपनी को तीन बार पत्र लिखा है। एंबुलेंस चलाने वाली जीवीके कंपनी के स्टेट हेड से बैठक भी हो चुकी है। 20 अगस्त तक उसने सभी एंबुलेंस ठीक कर देने को कहा है।’
डॉ. विजय यादव, सीएमओ