अमर उजाला भविष्य ज्योति सम्मान समारोह
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दस किताबें एक बार पढ़ने के बजाय एक किताब दस बार पढ़ें
मंडलायुक्त भूपेंद्र एस चौधरी ने कहा कि खेल हो या पढ़ाई, जितना ज्यादा बार अभ्यास होगा, उतना ही बेहतर परिणाम मिलेगा। कई किताबों को एक बार पढ़ने के बजाय एक किताब को अगर दस बार पढ़ेंगे तो सफलता दर बढ़ती जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि समय का सदुपयोग किया जाए। मोबाइल फोन, टीवी में समय बर्बाद करने से बचें। रास्ते कभी बंद कहीं होते। भविष्य उसी का होगा, जो मेहनत करेगा।
मां पहली गुरु हैं, शिक्षक का नंबर दूसरा है
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि ये सम्मान पहला पड़ाव है। जीवन में कितना भी आगे पहुंच जाएं पर जड़ों को कभी न भूलें। मां पहली गुरु हैं, शिक्षक का नंबर दूसरा है। अभी विद्यार्थी ऐसे मुकाम पर अवश्य पहुंचे, जहां से लोगों की सहायता कर सकें। असफलता से दोस्ती करो, जब ये आती है तो अवश्य कुछ लिखा जाती है। हमें असफलताओं से हार नहीं माननी चाहिए।
अनुशासन, सत्यनिष्ठा और हार नहीं मानने की भावना
एसएसपी अनुराग आर्ष ने कहा कि अमर उजाला की ये पहल छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करने का अवसर देती है। विद्यार्थी को ऑल राउंडर होना चाहिए। इसमें तीन बुनियादी बातें सबसे आवश्यक है, अनुशासन, सत्यनिष्ठा और हार नहीं मानने की भावना इससे जीवन में कुछ बेहतर अवश्य किया जा सकता है।
पदक पाकर खिले मेधावियों के चेहरे
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दबाव और चुनौतियों के लिए रहें तैयार
उप निदेशक कृषि हिमांशु पांडेय ने कहा कि 12वीं के बेहतर परिणाम से भविष्य तय नहीं होता। असली संघर्ष अब शुरू होगा। स्कूल की पढ़ाई एक सीमित दायरे में होती है, लेकिन डिग्री हासिल करने में दायरा बढ़ जाता है। 40 से 400 और फिर चार लाख अभ्यर्थियों में जगह बनाने के लिए उतने ही उच्च स्तरीय परिश्रम की जरूरत है। नियमित अध्ययन, आत्मविश्लेषण, धैर्य होना बेहद जरूरी है।
हम अपने कर्म को पहचानें
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कहा कि भगवत गीता में लिखा है कि हम कर्म और ज्ञान से ही कुछ पा सकते हैं। हमारे लिए आवश्यक है कि हम अपने कर्म को पहचानें। स्वयं से प्रतिस्पर्धा करें। जीवन का मंत्र है कर्म करिए। पढ़िए और जानिए। यदि असफलता भी आए तो उससे निराश न हों, आगे बढ़ते रहें।
लक्ष्य से चूकें तो तनाव न लें
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने कहा कि हमारी मेहनत को जब सम्मान मिलता है तो वह क्षण सबसे प्रिय होता है। यदि कुल अंकों से जीवन में कभी लक्ष्य से चूके तो तनाव न लें। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये मेरी छठी नौकरी है। जो कई सफलताओं और विफलताओं के बाद मैं कर रही हूं।
पदक पाकर खिले मेधावियों के चेहरे
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एएसपी अंजना दहिया ने कहा कि समय प्रबंधन के बिना सफलता मुमकिन नहीं। इसलिए रोज का टाइम टेबल बनाकर उसी अनुसार तैयारी करें। फोन का प्रयोग जरूरत के अनुसार ही करें। पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या भी पढ़ाई की क्षमता बढ़ाती है। सफलता को आदत बनाने के लिए सही कदम जरूरी है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद ने कहा कि कॅरिअर निर्माण में आत्मविश्वास की बड़ी भूमिका है। कई बार विद्यार्थी असफलता व दूसरों से तुलना के कारण तनाव में आ जाते हैं। ऐसे समय में सकारात्मक सोच बनाए रखना जरुरी है। माता-पिता व शिक्षकों से परामर्श लें।
एडीएम वित्त एवं राजस्व संतोष कुमार सिंह ने कहा कि अमर उजाला की पहल छात्र-छात्राओं को सीधा अधिकारियों से जोड़ती है। इससे विद्यार्थियों को कॅरिअर संबंधी मार्गदर्शन मिलता है। एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी ने भी छात्र-छात्राओं को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।