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‘निष्पक्षता के साथ देश में एक चुनाव होना मुमकिन नहीं’

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अमर उजाला द्वारा आयोजित कार्यक्रम एक देश एक चुनाव पर पक्ष-विपक्ष संवाद प्रतियोगिता का दीप जला कर
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श्री मुरारी लाल माहेश्वरी राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता
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बरेली। श्री मुरारी लाल माहेश्वरी राष्ट्रीय वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन शनिवार को महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में ‘एक देश-एक चुनाव’ विषय पर 12 महाविद्यालयों की टीमों ने पक्ष और विपक्ष में तार्किक ढंग से अपनी बात रखी। इसमें साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय से विपक्ष की प्रतिभागी सोनम शुक्ला प्रथम, बरेली कॉलेज से पक्ष में बोलने वाले मो. शारिक सवाब जैदी द्वितीय और खंडेलवाल कॉलेज से विपक्ष में बोलने वाली छात्रा लवी सिंह तृतीय रहीं। सिद्धि विनायक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अनुराग शर्मा और बरेली कॉलेज के यथार्थ आनंद को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रुहेलखंड विश्वविद्यालय में विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार सिंह रहे। वाद विवाद प्रतियोगिता में ‘एक देश-एक चुनाव’ विषय पर पक्ष के प्रतिभागियों ने इससे धन, श्रम और समय की बचत पर जोर दिया। वहीं विपक्ष का तर्क था कि इससे क्षेत्रीय दल और मुद्दों का अस्तित्व मिट जाएगा। प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं में गजब का उत्साह देखा गया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में बरेली कॉलेज की चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा, वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इतवारी और महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सौरभ अग्रवाल रहे। डॉ. वंदना शर्मा ने प्रतिभागियों को बेहतर होने के टिप्स दिए, डॉ. इतवारी लाल ने चुनाव प्रक्रिया पर बात की और डॉ. सौरभ ने कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम से पूर्व दीप प्रज्जवलन के बाद बैज लगाकर अतिथियों का सम्मान किया गया। संचालन डॉ. नीतू शर्मा ने किया। इस दौरान डॉ. कमल किशोर, अंकुर गुप्ता, डॉ. अनीता तिवारी, करिश्मा अग्रवाल समेत विभिन्न कॉलेजों के शिक्षक मौजूद रहे।
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जवान हो रहा है हमारा लोकतंत्र: डॉ. अमित
मुख्य अतिथि डॉ. अमित कुमार सिंह ने कहा लोकतंत्र के 70 साल कोई बहुत बड़ा समय नहीं है, इसे परिपक्व होने में 200 साल लगेंगे। अभी तो यह जवान हो रहा है। कहा- बीच-बीच में होने वाले चुनाव प्रगति को देखने की वही प्रक्रिया है, जैसे स्कूलों में बच्चे का टेस्ट होता है। रुपये और मशीनरी की बचत ही सब कुछ नहीं है। हमें देखना होगा कि इससे लोकतंत्र मजबूत होगा या कोई राजनीतिक पार्टी। जरा सी चूक पर एक छोटा सा वर्ग पूरे समाज पर हावी हो सकता है।
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इन कॉलेजों ने किया प्रतिभाग
बरेली कॉलेज बरेली, इन्वर्टिस विश्वविद्यालय, फ्यूचर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, सिद्धि विनायक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, खंडेलवाल कॉलेज, महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय, लोटस इंस्टीट्यूट, रक्षपाल बहादुर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय, वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय, कन्या महाविद्यालय भूड़, उत्कर्ष कॉलेज।
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