मीरगंज/दुनका। रामगंगा से लगातार हो रहे कटान से गांव कपूरपुर में नदी किनारे स्थित मंदिर का एक खंभा और कुछ हिस्सा शनिवार रात कट गया। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वहीं बहगुल नदी के कारण तेजी से हो रही कटान पर सुल्तानपुर गांव के बाशिंदों की चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीणों को पशुओं और अनाज की चिंता सता रही है।
करीब एक सप्ताह पहले से ही रामगंगा नदी से हो रही कटान मंदिर की ओर तेजी से बढ़ रही थी। मंदिर को बचाने के लिए बाढ़ खंड के कर्मचारी और ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण बढ़ते जलस्तर से मंदिर का अस्तित्व खतरे में है। ग्रामीणों ने प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है।
वहीं, बहगुल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण तेजी से हो रही कटान ने सुल्तानपुर गांव के ग्रामीणों के लिए चिंता बढ़ा दी है। नदी ने बसई की ओर से सुल्तानपुर की तरफ रुख करते हुए कटान को तेज कर दिया है। इस दौरान सैकड़ों बीघा कृषि भूमि और खड़ी फसलें नदी में समा चुकी हैं। पशुओं के चारे के अलावा अनाज की भी समस्या होने लगी है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान पर जल्द रोक नहीं लगी तो नदी गांव की आबादी की ओर बढ़ सकती है।
वर्ष 2011 में बहगुल नदी के कटान से सुल्तानपुर में करीब 75 घर बह गए थे। दोबारा कटान तेज होने से उन्हें पुराने हालात दोहराने का डर सता रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी लगातार खेतों को काट रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बहगुल नदी के कटान से गांव और कृषि भूमि को बचाने के लिए तत्काल पत्थरों की पिचिंग कराने की मांग की है। उनका मानना है कि पिचिंग से नदी के कटान पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
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कपूरपुर स्थित मंदिर को बचाने के लिए बाढ़ खंड लगातार प्रयास कर रहा है। तेज बहाव के कारण बचाव कार्य करने में बाधा आ रही है। बहगुल नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर प्रशासन की नजर है। विभागीय अधिकारियों और राजस्व टीम से स्थिति की जानकारी ली जा रही है। ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - निधि शुक्ला, एसडीएम मीरगंज