दीनी मसला ही नहीं, शायद कोई भी ऐसा विषय नहीं था जिस पर आला हजरत की पकड़ न थी। अगर उनके ‘रिसातुल बैंक’ को देखें तो उनमें परिपक्व अर्थशास्त्री भी नजर आता है। आला हजरत बरेलवी ने उस दौर में बैंकिंग की जरूरत महसूस की, जब देश में इसका ज्यादा वजूद नहीं था। बैंकिंग पर दिया गया उनका फतवा दुनिया भर में इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में आज इस्लामिक बैंक की अवधारणा चर्चा में है। इस्लामिक बैंकिंग के फार्मूले पर कुछ देशों ने बैंक भी स्थापित किए हैं। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी देश में शरिया बैंक खोलना प्रस्तावित किया था। इसके अलावा मुस्लिम मुल्कों के धन का निवेश बढ़ाने के लिए शरिया इंडेक्स शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इस्लामिक बैंकिंग का जहां जिक्र होता है वहां दुनिया भर में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का एक फतवा जरूर सामने आता है जो उन्होंने सन 1912 में दिया था। यह फतवा स्विटजरलैैंड के अलावा कई देशों में इस्लामिक बैंकों की स्थापना में मील का पत्थर साबित हुआ।