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अलर्ट: गांवों में लौटे प्रवासियों से संक्रमण की आशंका

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तमाम लोगों के संक्रमित होने का संदेह, गांवों में पांव पसार सकता है कोरोना
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स्वास्थ्य विभाग को प्रवासियों की पूल सैंपलिंग और रोकथाम के दिए हैं निर्देश

बरेली। अफसर भले ही जिले में प्रवासियों के लौटने के बाद संक्रमितों की तादाद तेजी से बढ़ने से इंकार कर रहे हों, लेकिन शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। शासन ने मई के आखिर और जून के शुरूआती दिनों में करीब 70 फीसदी प्रवासी श्रमिकों की वापसी की संभावना जताई है। इसे देखते हुए जून को संक्रमण के फैलाव का महीना मानते हुए अलर्ट जारी किया गया है। जिन गांवों में प्रवासी मजदूरों की संख्या ज्यादा है या जहां संक्रमित मिले हैं, वहां महीने भर में कई बार पूल सैंपलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद की ओर से कमिश्नर और डीएम को जारी आदेश में प्रवासियों की बड़ी पैमाने पर पूल सैंपलिंग कराने को कहा गया है। डीएम और कमिश्नर ने सीएमओ को पूल सैंपलिंग समेत अन्य व्यवस्थाएं करने के लिए पत्र भेज दिया है। प्रमुख सचिव ने आशंका जताई है कि प्रवासियों की वापसी के बाद प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ा है। प्रदेश में करीब 40 लाख प्रवासियों की वापसी की संभावना जताते हुए संवेदनशील स्थानों से आ रहे प्रवासियों के संक्रमित होने की भी बात कही गई है। लिहाजा, अफसरों को कोरोना संकमण को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रत्येक कार्य की रिपोर्ट से प्रतिदिन शासन को अवगत कराने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बरेली जिले में अब तक करीब 45 हजार प्रवासियों की वापसी हुई है। हालांकि, यह दावा कागजी है।

गांवों से शुरू होकर शहरों की ओर बढ़ेगा संक्रमण

प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश में आशंका जताई गई है कि बड़ी तादाद में वापस आने वाले प्रवासियों में तमाम संवेदनशील राज्यों से वापस आ रहे हैं। जहां संक्रमण की दर काफी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में उनमें भी संक्रमण की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। माह भर पहले कोरोना संक्रमण शहरी क्षेत्रों में केंद्रित था, मगर अब यह गांवों की ओर बढ़ गया है। ऐसे में यह आशंका बढ़ गई है कि आने वाले समय में संक्रमण गांवों से शहरों की ओर बढ़ेगा।

कम था शहर के संक्रमण से वायरस का फैलाव

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन का कहना है कि शहर में संक्रमितों के मिलने से फौरी तौर पर इलाज की व्यवस्था थी। इलाके को सैनिटाइज करना या आवाजाही बंद करना सब सीधे प्रशासन की निगरानी में था। वहीं, शहर में रहने वाले संक्रमित गांवों की ओर भी नहीं जाते थे। मगर, गांव में वापस आए प्रवासी या उनके परिजन जरूरत के सामान के लिए शहर की ओर जरूर आएंगे। ऐसी स्थिति में गांव के संक्रमितों से न सिर्फ गांव बल्कि शहर के लोगों को भी खतरा है। उन्होंने लोगों को बाजार में खरीदारी के लिए जाते समय एहतियात बरतने का सुझाव दिया है।

माह भर वृहद स्तर पर सैंपलिंग के दिए निर्देश

शासन की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक मई के आखिर तक ज्यादातर प्रवासी वापस आ जाएंगे। ऐसे में सर्वाधिक, मध्यम और निम्न तीन स्तर पर सर्वे कर प्राथमिकता के स्तर पर प्रवासियों समेत उनके गांव वालों की पूल सैंपलिंग के निर्देश दिए गए हैं। सामुदायिक निगरानी के लिए गठित कमेटियों को एक्टिव करने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षित करने के भी निर्देश दिए हैं। इसमें प्रधान, सचिव, आशा वर्कर, एएनएम समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल करने को कहा है।
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चुनौतियों से पार पाना भी मुश्किल

पहले नजरंदाज किया अब कैसे संभालेंगे स्थिति

करीब दो माह से शहर में प्रवासियों की वापसी का दौर जारी है। शुरुआत में प्रशासन ने सीमाएं सील करा दीं थीं, मगर अब कोई जांच नहीं की जा रही है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों या बसों से आए प्रवासियों को क्वारंटीन कराया जा रहा है। मगर, जो लोग संवेदनशील इलाकों से पैदल या अन्य साधनों से ही सीधे अपने गांव पहुंच रहे हैं न तो उनकी पहचान हो पा रही है और न ही जांच। प्रशासन की यह खामी लोगों के लिए खतरे का संकेत है।

हजारों प्रवासियों की जांच की सुविधा नहीं

पिछले दिनों बरेली समेत पीलीभीत और बदायूं के सैंपल की रिपोर्ट मिलने में लेटलतीफी होने पर अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से 60 से 70 सैंपल ही जांच को भेजे जा रहे हैं। ऐसे में अगर एक गांव में एक ही पूल सैंपल होगा तो अधिकतम पांच व्यक्ति की सैंपलिंग हो सकेगी। मगर, अन्य प्रवासियों की सैंपलिंग न होने से इस कवायद का भी खास असर होगा, ऐसी उम्मीद नहीं दिख रही है।

प्रभारी मंत्री के निर्देश का भी नहीं हो रहा पालन

जानकारी के मुताबिक वापस आ रहे प्रवासियों को सीमा पर जांच के बाद ही जिले में प्रवेश की अनुमति है। पिछले दिनों प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी प्रवासियों की स्क्रीनिंग और जांच के बाद ही प्रवेश देने को हिदायत दी है। मगर, यह आदेश महज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक ही सीमित दिखाई दे रहा है। रोजाना तमाम प्रवासी शहर में आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सीमा पर तैनात पुलिस लोगों का नाम, पता दर्ज कर उन्हें प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के आंकड़ों में फर्क

प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 15 हजार ही प्रवासी वापस आए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में चल रही स्क्रीनिंग में अब तक बाहर से गांव वापस आए करीब 43832 लोगों को क्वारंटीन कराया जा चुका है। इसके अलावा 996 लोग शहर और 1785 लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन कराया गया है।

संक्रमितों का डाटा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राप्त 28 मई तक की रिपोर्ट के अनुसार बरेली में अब तक 2083 संदिग्ध संक्रमितों के सैंपल लेकर जांच कराई गई है। इसमें 1925 सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव और 44 पॉजिटिव आए हैं। जिसमें दो संक्रमित की मौत हो चुकी है। 29 एक्टिव केस हैं। अभी 114 सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है।

शासन की ओर से जारी आदेश में प्रवासियों के वापस आने के बाद गांव में पूल सैंपलिंग के निर्देश मिले हैं। इस बाबत सभी प्रवासियों की जांच करने के लिए निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। गांव में आरबीएसके की टीम जांच समेत लोगों को बचाव के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

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