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सपा की नई रणनीति: अखिलेश-आजम की मुलाकात पर टिकी निगाहें, रुहेलखंड में बदलेंगे सियासी समीकरण!

Thu, 22 Oct 2026 10:23 AM IST
Mukesh Kumar अमित सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आजम खां की प्रस्तावित मुलाकात से सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात से रुहेलखंड में सपा की चुनावी रणनीति तय होगी। दोनों नेताओं की मुलाकात पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।  
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अखिलेश यादव और आजम खां की मुलाकात पर टिकी निगाहें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) ने रुहेलखंड में अपने रणनीतिक ताने-बाने को मजबूत करना शुरू कर दिया है। रामपुर जेल में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के बीच प्रस्तावित मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट न मानकर, आगामी चुनाव के लिए टिकट चयन और रणनीतिक मंथन से जोड़कर देखा जा रहा है। 

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रुहेलखंड की ज्यादातर सीटों पर आजम खां का राजनीतिक रसूख हमेशा असरदार रहा है। खासतौर पर बरेली शहर और इसके आसपास के इलाकों में संगठन की जमीनी स्थिति को मजबूत करने के लिए आजम खां की राय को काफी अहम माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में सपा ने बरेली मंडल में सम्मानजनक प्रदर्शन किया था।  

सपा ने बदायूं की तीन और बरेली की दो सीटों (भोजीपुरा और बहेड़ी) पर जीत दर्ज कर अपना कब्जा जमाया था। वहीं, बरेली कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पूर्व महापौर ने भाजपा को कड़ी टक्कर देकर पार्टी के लिए मजबूत आधार तैयार किया था। यहां हार का अंतर महज 10 हजार मतों का ही था। 2012 से पहले यह सीट भाजपा के पास कभी नहीं रही। ऐसे ही अन्य सीटों पर भी समीकरण तलाशे जा रहे हैं।

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पूर्व सांसद के सपा में शामिल होने से बदला सियासी गणित 
हाल ही में पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद क्षेत्र का राजनीतिक गणित बदला है। उनके साथ ही बदायूं के दो पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और सिनोद शाक्य भी सपा का दामन थामने जा रहे हैं। पार्टी अब मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ हिंदू चेहरों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर आगे बढ़ने की योजना बना रही है। इसी नए समीकरण के तहत शहर और आसपास की कुछ प्रमुख सीटों पर सपा हिंदू चेहरों पर दांव आजमाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। 

आजम खां की छाप और प्रत्याशी चयन
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव की आजम खां से वह मुलाकात केवल हलचल जानने तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रबंधन के इस अंतिम दौर में प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों नेताओं के बीच गहरी चर्चा हो सकती है। मुरादाबाद और बरेली मंडल की कई सीटों पर एक-एक टिकट के लिए कई-कई दावेदार कतार में हैं, ऐसे में आजम खां का परामर्श प्रत्याशी तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 
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आजम बड़े समाजवादी नेता, उनकी राय अहम : वीरपाल
पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव ने बताया कि आजम खां केवल मुस्लिम वर्ग के नेता नहीं बल्कि समाजवादी विचारधारा के बड़े नेता हैं। वह सपा के संस्थापक सदस्य हैं। पिछले दिनों जब जेल से छूटे तो उन्हें वाई श्रेणी सुरक्षा दी गई थी। अखिलेश यादव ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है। रही प्रत्याशी चयन की बात तो आजम खां से सलाह करने में पार्टी का भला ही होगा। 

बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते : मौलाना रजवी
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि चुनाव नजदीक देखकर अखिलेश यादव मुस्लिमों को रिझाने आ रहे हैं। उन्हें लगता है वह आजम खां से मिल लेंगे तो मुसलमान एकतरफा सपा को वोट दे देगा, अब ऐसा नहीं है। आजम खां को रामपुर जेल में 370 दिन गुजर चुके हैं, अब तक अखिलेश उनसे मिलने नहीं गए। सीतापुर जेल में चार साल तक दूरी बनाए रखी। वे सच में मुस्लिम हितैषी हैं तो मुख्यमंत्री पद पर सपा से किसी मुस्लिम चेहरे का नाम प्रस्तावित करें। 
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