पूर्व सांसद के सपा में शामिल होने से बदला सियासी गणित
हाल ही में पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद क्षेत्र का राजनीतिक गणित बदला है। उनके साथ ही बदायूं के दो पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और सिनोद शाक्य भी सपा का दामन थामने जा रहे हैं। पार्टी अब मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ हिंदू चेहरों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर आगे बढ़ने की योजना बना रही है। इसी नए समीकरण के तहत शहर और आसपास की कुछ प्रमुख सीटों पर सपा हिंदू चेहरों पर दांव आजमाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
आजम खां की छाप और प्रत्याशी चयन
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव की आजम खां से वह मुलाकात केवल हलचल जानने तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रबंधन के इस अंतिम दौर में प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों नेताओं के बीच गहरी चर्चा हो सकती है। मुरादाबाद और बरेली मंडल की कई सीटों पर एक-एक टिकट के लिए कई-कई दावेदार कतार में हैं, ऐसे में आजम खां का परामर्श प्रत्याशी तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
आजम बड़े समाजवादी नेता, उनकी राय अहम : वीरपाल
पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव ने बताया कि आजम खां केवल मुस्लिम वर्ग के नेता नहीं बल्कि समाजवादी विचारधारा के बड़े नेता हैं। वह सपा के संस्थापक सदस्य हैं। पिछले दिनों जब जेल से छूटे तो उन्हें वाई श्रेणी सुरक्षा दी गई थी। अखिलेश यादव ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है। रही प्रत्याशी चयन की बात तो आजम खां से सलाह करने में पार्टी का भला ही होगा।
बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते : मौलाना रजवी
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि चुनाव नजदीक देखकर अखिलेश यादव मुस्लिमों को रिझाने आ रहे हैं। उन्हें लगता है वह आजम खां से मिल लेंगे तो मुसलमान एकतरफा सपा को वोट दे देगा, अब ऐसा नहीं है। आजम खां को रामपुर जेल में 370 दिन गुजर चुके हैं, अब तक अखिलेश उनसे मिलने नहीं गए। सीतापुर जेल में चार साल तक दूरी बनाए रखी। वे सच में मुस्लिम हितैषी हैं तो मुख्यमंत्री पद पर सपा से किसी मुस्लिम चेहरे का नाम प्रस्तावित करें।