बरेली। दूर से देखने पर कार्ल सेगन को यह धरती ब्रह्मांड में धुंधले नीले बिंदु सी नजर आई थी। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और रंग विनायक रंगमंडल के मुख्य संरक्षक डाॅ. ब्रजेश्वर सिंह का नाटक ‘पेल ब्लू डॉट’ इसका ठीक उल्टा करता है। एक पुरानी याद, अंगुलियों से फिसलता रिश्ता, गुजरे हुए कल का डरावना सच, कुछ कविताएं, एक अधूरा गीत इस नाटक में ब्रह्मांड जितना बड़ा लगता है।
रविवार को विंडरमेयर थिएटर में मंचित इस नाटक का कथानक स्पर्श के डर से जूझते अजानुबाहु की कहानी और कोविड के जाल में फंसी दुनिया के इर्द-गिर्द घूमता है। नाटक कोविड के भयावह दौर से शुरू होता है, मगर अजानुबाहु के अतीत से हर पल जुड़ा रहता है। कोविड के कारण सारे लोग छूने से डरते हैं, मगर अजानुबाहु तो न जाने कब से स्पर्श से सहमा रहा है। अजानुबाहु के अपने एक-एक करके कोविड का शिकार हो रहे हैं और वह पागल होता जा रहा है। आखिर में एक ऐसा किरदार अजानुबाहु को बचाने आता है, जिसके आने की कोई उम्मीद नहीं थी। मगर अब बहुत देर हो चुकी है। अगर कुछ बचा है तो सिर्फ यादें, कविताएं और दिल को हिलाकर रख देने वाली खामोशी। भरी-पूरी दुनिया महज़ ‘पेल ब्लू डॉट’ बनकर रह जाती है।