ग्रीन पटाखों से कम होता है प्रदूषण
क्षेत्रीय अधिकारी चंद्रेश कुमार के मुताबिक ग्रीन पटाखों में ध्वनि तीव्रता और धुएं का घनत्व सामान्य पटाखों के सापेक्ष 30 फीसदी कम होता है। जलने की अवधि भी कम होती है। यही वजह है कि आतिशबाजी ज्यादा होने के बाद भी वायु गुणवत्ता सूचकांक पिछले साल के आसपास ही रहा।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि शहर में नगर निगम की जागरूकता टीम ने नुक्कड़ नाटक और दूसरे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को प्रदूषण के खतरे गिनाए और जागरूकता का महत्व भी समझाया है।
वर्षवार दिवाली पर एक्यूआई
वर्ष 2012 में 378, 2013 में 398, 2014 में 421, 2015 में 442, 2016 में 396, 2017 में 410, 2018 में 435, 2019 में 398, 2020 में 392, 2021 में 415, 2022 में 262, 2023 में 208, 2024 में 216 एक्यूआई था।
व्यावसायिक क्षेत्रों में एक्यूआई और ज्यादा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो व्यावसायिक क्षेत्र के सापेक्ष आवासीय इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सामान्य से ज्यादा रहा। आवासीय क्षेत्र राजेंद्र नगर का एक्यूआई 210 यानी सामान्य से 110 अधिक रहा। जो खतरनाक रहा। सिविल लाइंस व्यावसायिक क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता का स्तर 180 रहा। जो 80 एक्यूआई ज्यादा रहा। छोटी दिवाली रविवार को एक्यूआई 130 और मंगलवार को 168 दर्ज हुआ।
हवा की गुणवत्ता
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201-300 बुरा
401+ से अधिक : स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक