बरेली। श्रेष्ठ संतान और सुख समृद्धि के लिए कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता पार्वती के अहोई स्वरूप का पूजन किया जाता है। इस बार अहोई अष्टमी 8 नवंबर को है।
पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर ने बताया कि अहोई अष्टमी करवाचौथ के चार दिन बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। पद्मपुराण में कार्तिक मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि पुत्रों की सुख समृद्धि के लिए महिलाएं ये व्रत रखती हैं। इस व्रत के रखने से निसंतानों को संतान की प्राप्ति होती है। अहोई अष्टमी में रोली-चावल, धूप-दीप, पुष्प से पूजा की जाती है। महिलाएं अहोई अष्टमी से संबंधित कथा पढ़ती हैं। व्रत के लिए कलश के साथ करवाचौथ में प्रयोग किए हुए करवे में ही जल भर लिया जाता है। इसके बाद दीवार पर गोबर से आठ कोष्ठक बनाए जाते हैं शाम को फल, फूल, मिठाई और पकवान का भोग लगाकर और तारे देखकर व्रत खोला जाता है।