बरेली। अहोई अष्टमी का पर्व बृहस्पतिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। माताओं ने अपनी संतानों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा। इस बार खास यह रहा कि बेटियों के लिए भी व्रत रखा गया और अहोई माता से उनकी लंबी उम्र और बेहतरी की प्रार्थना की। पूजा के बाद माताओं ने तारों के दर्शन कर, अपना व्रत खोला।
परंपरा के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत बेटों की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है, लेकिन अब इस व्रत को बेटियों के लिए भी रखा जाने लगा है। समय में बदलाव के साथ, कई माताएं अपनी बेटियों के उज्जवल भविष्य और सुखद जीवन की कामना के लिए उपवास रखती हैं और अहोई माता से प्रार्थना करती हैं। माताएं सुबह से ही उपवास पर रहीं और शाम को विधिपूर्वक अहोई माता की अराधना की। पूजा के दौरान माताओं ने अहोई माता की कथा सुनी और संतान की दीर्घायु और कुशलता के लिए आशीर्वाद मांगा।
बेटियों की भी है चिंता
समाज में बेटियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। मां-बाप अपनी बेटियों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के लिए भी उतने ही चिंतित रहते हैं जितना बेटों के लिए, इसलिए मैंने अपनी बेटी के लिए भी व्रत रखने का निर्णय लिया। - रिचा अग्रवाल
पहले यह व्रत सिर्फ बेटों के लिए किया जाता था, लेकिन मैं इसे अपनी बेटियों के लिए रखती हूं। बेटी भी तो घर की रौनक होती है, उसकी कुशलता और लंबी उम्र की कामना करना उतना ही जरूरी है। - पायल अग्रवाल
मेरी दो बेटियां हैं और मैं उनके भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखती हूं। बेटियां भी आजकल हर क्षेत्र में बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हैं, उनकी मंगलकामना करना उतना ही आवश्यक है। - तान्या अग्रवाल
समाज में समय के साथ बहुत कुछ बदल रहा है। पहले सिर्फ बेटों के लिए व्रत रखने की परंपरा थी, लेकिन अब बेटियों को भी उतनी ही अहमियत दी जाने लगी है, इसलिए मैंने अपनी बेटियों के लिए भी अहोई व्रत रखने की शुरूआत की। - सौम्या जिंदल