बरेली। लेखपाल सावन जायसवाल के गिरोह की तरह एक और गिरोह इज्जतनगर थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां भवन मालिक को पता ही नहीं चला और दो लोगों ने कोर्ट में दावा कर 40 लाख के मकान का एग्रीमेंट चार लाख में करा लिया। पीड़ित की शिकायत पर एसएसपी ने कातिब के चार ज्ञात और तीन-चार अज्ञात गुर्गों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। जल्द बड़ा खुलासा हो सकता है।
इज्जतनगर क्षेत्र निवासी अशोक कुमार ने एलएलबी पास कर एलएलएम की प्रवेश परीक्षा दी है। अशोक ने इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट कराई है कि उनकी मां ने सन 1998 में आदर्श सहकारी समिति से किश्तों पर 108 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था। प्लॉट का बैनामा सन 2000 में मां ने अपने नाम कराया था। वर्ष 2004 में मां ने सिटी सब्जी मंडी निवासी मदनमोहन शर्मा के पास बैनामा के कागज रखकर दो लाख रुपये कमरे बनवाने को लिए थे। मदनमोहन ने सादा कागज और नोटरी पर अंगूठा लगवा लिया। मदनमोहन को मय ब्याज मूल रकम लौटा दी लेकिन बैनामा मांगने पर मनमोहन टालमटोल करने लगा।
आरोप है कि वर्ष 2011 में मदनमोहन ने फर्जी दस्तावेज के जरिए अपने रिश्तेदार किला के पंजाबपुरा निवासी अमित तिवारी और विकास तिवारी के नाम महज साढ़े चार लाख रुपये में उनके मकान का एग्रीमेंट कर दिया। सुनियोजित तरीके से अमित तिवारी ने मदनमोहन शर्मा के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर किया। मुकदमे में मदनमोहन कोर्ट ही नहीं गया। इससे कोर्ट ने अमित के पक्ष में एकतरफा आदेश कर दिया। अशोक ने बताया कि वह और उनका परिवार 27 साल से इसी मकान में रह रहा है। कोर्ट को भ्रमित कर लिए आदेश के बाद अमित तिवारी, विकास तिवारी, नावेद, कुबड़ा और गिरोह का सरगना कातिब मकान बेचने और खाली कराने में लग गए। 2019 में मदनमोहन की मृत्यु के बाद चारों ने कई भूमाफिया को मकान बेचने की कोशिश की। ब्यूरो
जिसका घर, उसी पर दर्ज कराया कब्जे का मुकदमा
अशोक ने बताया कि जब अमित के पक्ष में आदेश आया तो उनकी मां संगीता ने सारी जानकारी निकलवाने के बाद सिविल न्यायालय में वाद दायर किया। इससे नाराज होकर 2022 में कातिब ने अमित की ओर से इज्जतनगर थाने में उन्हीं पर मकान कब्जाने का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमे की गलत विवेचना करने वाला विवेचक भ्रष्टाचार के मुकदमे में जेल जा चुका है। जिसका घर है उन्हीं को आरोपी बनाने वाले विवेचक की भूमिका की जांच हुई तो उसकी भी गर्दन फंसना तय है। वहीं इस मुकदमे में कातिब का भी फंसना तय है जिसने झूठी गवाही दी थी।
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अमित और विकास प्यादे, असली मास्टरमाइंड कातिब
बताया जा रहा है कि 2011 में मकान का एग्रीमेंट जिस अमित और विकास के नाम कराया गया, वह महज प्यादे हैं। दोनों कातिब के भाई हैं और उसके लिए काम करते हैं। कातिब सफेदपोश, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और भूमाफिया का काला रुपया ब्याज पर उठाने व विवादित संपत्ति खरीदने का काम करता है। कातिब मुकदमेबाजी में फंसाकर औने-पौने दाम में संपत्ति हड़प लेता है।
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कप्तान से शिकायत, जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज
अशोक कुमार ने सीएम, डीजीपी व एसएसपी से शिकायत की थी। एसएसपी अनुराग आर्य ने शिकायत को गंभीरता से लेकर इज्जतनगर इंसपेक्टर से प्रारंभिक जांच कराई। थाने में अमित को बुलाया तो उसने बताया कि वह मकान में दो महीने रहा है। इंसपेक्टर ने अमित के साथ पुलिस भेजकर इसकी तस्दीक करने के लिए कहा तो अमित थाने से खिसक लिया। पुलिस ने मौके पर पूछताछ की तो पड़ोसियों ने अमित और विकास नाम के लोगों को पहचानने से मना कर दिया। फर्जी मुकदमे में जिन पड़ोसियों को गवाह बनाया गया, उन्होंने बताया कि दरोगा को उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। पुलिस ने जांच रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी। एसएसपी के आदेश पर इज्जतनगर थाने में मामला दर्ज किया गया है। कातिब का नाम शामिल होने के बाद उसके कई और फर्जीवाड़े जल्दी खुल सकते हैं।