दो दिन बाद ही फिर बड़ा रेल हादसा टल गया। रामगंगा पुल से वाया चंदौसी मुरादाबाद यार्ड जाने वाले रेल पथ पर टेढ़ी पटरी पर ही सोमवार की रात अमृतसर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें गुजर गईं। मंगलवार सुबह लाइन मैन ने पटरी को टेढ़ा हुआ देखा तो कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद आननफानन में सुबह दस बजे ट्रैक की मरम्मत शुरू की गई। इस बीच ट्रेनों को 30 किमी घंटा की रफ्तार के कॉशन पर गुजारा गया।
रामगंगा पुल से आगे 1395 से 1396 किमी पर सुबह ट्रैक की जांच कर रहे लाइनमैन ने खतरनाक हद तक टेढ़ी हो चुकी पटरी देखने के बाद तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर और मंडल कंट्रोल रूम को दी। इसके बाद हादसे की आशंका देखते हुए फौरन इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया। मुरादाबाद से तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। मंगलवार सुबह 10 बजे मरम्मत कार्य शुरू किया गया। हालांकि इससे पहले रात में अमृतसर एक्सप्रेस, बरेली-अलीगढ़ पैसेंजर समेत कई ट्रेनें इसी टेढ़ी पटरी से गुजर चुकी थीं।
डिस्ट्रेसिंग की वजह से टेढ़ी हुई पटरी
तकनीकी टीम की जांच में पाया गया कि रेल पटरी डिस्ट्रेसिंग की वजह से टेढ़ी हो गई थी। अक्सर तापमान में बदलाव होने पर यह समस्या सामने आती है। तकनीकी टीम ने पटरी को खोलने के बाद उसे पीट-पीटकर कर यह आकलन किया कि वह कितनी लंबी हुई है। इसके बाद बढ़े हुए हिस्से को काटकर दोबारा पटरी जोड़ी गई।
सिर्फ सुबह होती है ट्रैक की जांच
स्टेशन मास्टर चेतन शर्मा के मुताबिक ट्रैक की जांच करना इंजीनियरिंग विभाग का काम है। कीमैन तो सिर्फ सुबह के वक्त ट्रैक की जांच करते हैं। बारिश और ठंड की धुंध छाने पर दो शिफ्टों में रेल पथ की जांच होती है।
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रेलवे की चूक.. कई बार होने से बचे हादसे
22 अक्तूबर 2017 डबल डेकर समेत कई ट्रेनें जंक्शन के पास चटकी पटरी से गुजार दी गई थीं।
6 सितंबर 2017 कहेलिया और एगवा रेलवे स्टेशन के बीच मुगलसराय एक्सप्रेस चटकी पटरी से गुजर गई थी।
24 जून 2016 चनेहटी रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी ऐसी ही चूक की वजह से बेपटरी हो गई थी।
17 नवंबर 2014 मीरगंज के नजदीक चटकी पटरी से हरिद्वार एक्सप्रेस पलटने से बच गई थी।