कॉलेजों में पढ़ाई समयबद्ध तरीके से पूरी कराने का जिम्मा विश्वविद्यालय प्रशासन का होता है लेकिन जब विश्वविद्यालय खुद ही समय से पढ़ाई पूरी कराने में पिछड़ने लगे तो क्या कहा जाए। एमएड के मामले में ऐसा ही हुआ है। कॉलेजों ने तो 2015-17 के एमएड बैच समय से पास आउट कर दिए लेकिन रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस का बैच एक-दो माह नहीं बल्कि पूरे एक सेमेस्टर पिछड़ गया है। स्थिति यह है कि विवि का एमएड बैच 2018 में पूरा हो पाएगा। विवि की इस लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
तीन माह काउंसलिंग लेट हुई तो छह माह कर दिया कोर्स पीछे
एमएड 2015-17 के प्रवेश बीएड के परिणाम लेट घोषित होने के कारण अगस्त की जगह नवंबर में हुए थे। विश्वविद्यालय के साथ कॉलेजों में भी प्रवेश विलंब से हुए लेकिन कॉलेजों ने एनसीटीई के मानकों के अनुसार क्लास पूरी कर लीं। कॉलेजों में एमएड की वार्षिक परीक्षाएं होने के बाद रिजल्ट भी घोषित हो चुका है लेकिन विवि परिसर में लास्ट सेमेस्टर की अभी परीक्षाएं भी नहीं हुई हैं। परीक्षाएं 2018 में हो पाने की उम्मीद है।
एनसीटीई के मानकों के अनुसार साल में 220 दिन की कक्षाएं पूरी होनी चाहिए थी जो कि नहीं हो पाईं। दिसंबर में फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाएं होंगी। बीएड का परिणाम लेट घोषित होने से प्रवेश लेट हुए थे, जिसका असर अब पड़ रहा है।
- प्रोफेसर बीआर कुकरेती, हेड शिक्षा एवं सहबद्ध विज्ञान विभाग
छात्रों ने विवि प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया
विवि से एमएड कर रहे छात्रों का कहना है कि विवि प्रशासन की लापरवाही के कारण उनका कोर्स पिछड़ा। उनके साथ जिन छात्रों ने कॉलेजों में एमएड में प्रवेश लिया, उनका कोर्स पूरा हो गया है। उनको नौकरी भी मिल जाएगी और तब तक हमारा कोर्स पूरा हो पाएगा। अगर कक्षा के दिन पूरे नहीं हो रहे थे तो अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर पूरे कराने चाहिए थे। कोर्स समय से पूरा होना चाहिए था।