वैज्ञानिक तकनीकी पर आधारित खेती से ही न्यूनतम संसाधन में उत्पादन ज्यादा होना संभव है। जलवायु परिवर्तन के दौरान परंपरागत खेती से आय बढ़ाना मुश्किल है। किसानों को फर्टिलाइजर मैनेजमेंट, ग्रीन मैन्योरिंग, एकीकृत कृषि प्रणाली, पशु अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। बृहस्पतिवार को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में कृषि विज्ञान केंद्र की 29वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति बैठक में ये विचार अटारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने साझा किए। किसानों की समस्या समाधान, सरकारी योजना के प्रसार और एकीकृत कृषि मॉडल अपनाने पर जोर दिया। आईवीआरआई निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने उन तरीकों पर कार्य करने का समर्थन किया जिससे आय के कई विकल्प हों। संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने कहा कि केंद्र की ओर से गेहूं, धान, सरसों का बीज राष्ट्रीय बीज निगम को दे रहे हैं।